कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२९ / १६४ № 129 of 164 रचना १२९ / १६४
२० सितम्बर २०१७ 20 September 2017 २० सितम्बर २०१७

बरखा रानी विदा हुई barakhaa raanee widaa huee बरखा रानी विदा हुई

बरखा रानी विदा हुई

॥

दे नीर, समेट दुकूल।

॥

मुखर हुआ माटी का कण-कण

॥

खिले आस के फूल।

॥

मानसून ने खूब दिया जल

॥

सबको एक समान।

॥

नदी, ताल, सागर, झरने या

॥

हों बंजर मैदान।

॥

जलधाराएँ झूम रहीं हैं

॥

किलक रहे हैं कूल।

॥

भोर भिगोती हवा सुगंधित

॥

शीतल हुई दुपहरी

॥

खेत-वनों बागों में

बिखरी

॥

जीवन की स्वर लहरी

॥

संध्या रानी बन दीवानी

॥

झूल रही है झूल

॥

मुखर हुईं गुपचुप कलियों

से

॥

भँवरों की

barakhaa raanee widaa huee

·

de neer, samet dukool

·

mukhar huaa maatee kaa kan-kan

·

khile aas ke phool

·

maanasoon ne khoob diyaa jal

·

sabako ek samaan

·

nadee, taal, saagar, jharane yaa

·

hon banjar maidaan

·

jaladhaaraaen jhoom raheen hain

·

kilak rahe hain kool

·

bhor bhigotee hawaa sugandhit

·

sheetal huee dupaharee

·

khet-wanon baagon men

bikharee

·

jeewan kee svar laharee

·

sandhyaa raanee ban deewaanee

·

jhool rahee hai jhool

·

mukhar hueen gupachup kaliyon

se

·

bhanvaron kee

बरखा रानी विदा हुई

॥

दे नीर, समेट दुकूल।

॥

मुखर हुआ माटी का कण-कण

॥

खिले आस के फूल।

॥

मानसून ने खूब दिया जल

॥

सबको एक समान।

॥

नदी, ताल, सागर, झरने या

॥

हों बंजर मैदान।

॥

जलधाराएँ झूम रहीं हैं

॥

किलक रहे हैं कूल।

॥

भोर भिगोती हवा सुगंधित

॥

शीतल हुई दुपहरी

॥

खेत-वनों बागों में

बिखरी

॥

जीवन की स्वर लहरी

॥

संध्या रानी बन दीवानी

॥

झूल रही है झूल

॥

मुखर हुईं गुपचुप कलियों

से

॥

भँवरों की

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗