कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२८ / १६३ № 128 of 163 रचना १२८ / १६३
२० सितम्बर २०१७ 20 September 2017 २० सितम्बर २०१७

बरखा रानी विदा हुई barakhaa raanee widaa huee बरखा रानी विदा हुई

बरखा रानी विदा हुई

दे नीर, समेट दुकूल।

मुखर हुआ माटी का कण-कण

खिले आस के फूल।

मानसून ने खूब दिया जल

सबको एक समान।

नदी, ताल, सागर, झरने या

हों बंजर मैदान।

जलधाराएँ झूम रहीं हैं

किलक रहे हैं कूल।

भोर भिगोती हवा सुगंधित

शीतल हुई दुपहरी

खेत-वनों बागों में

बिखरी

जीवन की स्वर लहरी

संध्या रानी बन दीवानी

झूल रही है झूल

मुखर हुईं गुपचुप कलियों

से

भँवरों की

barakhaa raanee widaa huee

·

de neer, samet dukool

·

mukhar huaa maatee kaa kan-kan

·

khile aas ke phool

·

maanasoon ne khoob diyaa jal

·

sabako ek samaan

·

nadee, taal, saagar, jharane yaa

·

hon banjar maidaan

·

jaladhaaraaen jhoom raheen hain

·

kilak rahe hain kool

·

bhor bhigotee hawaa sugandhit

·

sheetal huee dupaharee

·

khet-wanon baagon men

bikharee

·

jeewan kee svar laharee

·

sandhyaa raanee ban deewaanee

·

jhool rahee hai jhool

·

mukhar hueen gupachup kaliyon

se

·

bhanvaron kee

बरखा रानी विदा हुई

दे नीर, समेट दुकूल।

मुखर हुआ माटी का कण-कण

खिले आस के फूल।

मानसून ने खूब दिया जल

सबको एक समान।

नदी, ताल, सागर, झरने या

हों बंजर मैदान।

जलधाराएँ झूम रहीं हैं

किलक रहे हैं कूल।

भोर भिगोती हवा सुगंधित

शीतल हुई दुपहरी

खेत-वनों बागों में

बिखरी

जीवन की स्वर लहरी

संध्या रानी बन दीवानी

झूल रही है झूल

मुखर हुईं गुपचुप कलियों

से

भँवरों की

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗