कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११२ / २०४ № 112 of 204 रचना ११२ / २०४
२५ दिसम्बर २०१५ 25 December 2015 २५ दिसम्बर २०१५

नए साल की भोर लो मुस्कुराई nae saal kee bhor lo muskuraaee नए साल की भोर लो मुस्कुराई

सितारों

ने भेजी भुवन को बधाई।

नए

साल की भोर,

लो

मुस्कुराई।

गगन

ने किया घोर, कोहरे से स्वागत

चमन

ने सुगंधों से देहरी सजाई।

जले

नव उमंगों के दिलदार दीपक

भुला

बीती बेदिल हवा की ढिठाई।

यही

दिन तो देता सकल साल संबल

बनी

रहती हर मुख पे लालिम लुनाई।

चलो

कर लें पूरे, सपन इस बरस में

हो लक्ष्य पाने में कोई ढिलाई।

बिठाएँ

नवागत को मन के फ़लक पर

कि

देकर विगत को विहंगम विदाई।

नए

जोश से हक़ की, फिर वो मुखर हो

जो

आवाज़ कल तक गई थी दबाई।

चेताएँ

उन्हें पथ बदल दें पतन का

नराधम

निरे, क्रूर, कातिल कसाई।

फलें

‘कल्पना’ साल भर

प्रार्थनाएँ

मिले

रब की सबको, सतत रहनुमाई।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

sitaaron

ne bhejee bhuwan ko badhaaee

·

nae

saal kee bhor,

lo

muskuraaee

·

gagan

ne kiyaa ghor, kohare se svaagat

·

chaman

ne sugandhon se deharee sajaaee

·

jale

naw umangon ke diladaar deepak

·

bhulaa

beetee bedil hawaa kee dhithaaee

·

yahee

din to detaa sakal saal sanbal

·

banee

rahatee har mukh pe laalim lunaaee

·

chalo

kar len poore, sapan is baras men

·

n

ho lakshy paane men koee dhilaaee

·

bithaaen

nawaagat ko man ke falak par

·

ki

dekar wigat ko wihangam widaaee

·

nae

josh se haq kee, phir wo mukhar ho

·

jo

aawaaz kal tak gaee thee dabaaee

·

chetaaen

unhen path badal den patan kaa

·

naraadham

nire, kroor, kaatil kasaaee

·

phalen

‘kalpanaa’ saal bhar

praarthanaaen

·

mile

rab kee sabako, satat rahanumaaee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

सितारों

ने भेजी भुवन को बधाई।

नए

साल की भोर,

लो

मुस्कुराई।

गगन

ने किया घोर, कोहरे से स्वागत

चमन

ने सुगंधों से देहरी सजाई।

जले

नव उमंगों के दिलदार दीपक

भुला

बीती बेदिल हवा की ढिठाई।

यही

दिन तो देता सकल साल संबल

बनी

रहती हर मुख पे लालिम लुनाई।

चलो

कर लें पूरे, सपन इस बरस में

हो लक्ष्य पाने में कोई ढिलाई।

बिठाएँ

नवागत को मन के फ़लक पर

कि

देकर विगत को विहंगम विदाई।

नए

जोश से हक़ की, फिर वो मुखर हो

जो

आवाज़ कल तक गई थी दबाई।

चेताएँ

उन्हें पथ बदल दें पतन का

नराधम

निरे, क्रूर, कातिल कसाई।

फलें

‘कल्पना’ साल भर

प्रार्थनाएँ

मिले

रब की सबको, सतत रहनुमाई।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗