कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३४ / ५२ № 34 of 52 रचना ३४ / ५२
१९ अगस्त २०१६ 19 August 2016 १९ अगस्त २०१६

टेरि काँग तूँ दिसी कुननि में teri kaang toon disee kunani men टेरि काँग तूँ दिसी कुननि में

झगड़ो

थ्यो घर जे भाँडनि में।

घर

पहुता होटल-मालनि में।

वसिणो

हुयुनि सुकल धरतीअ ते

ककर

वस्या पर पूर नंदिनि में।

मानु

न करि नीलामु असाँजो

टेरि

काँग तूँ दिसी कुननि में।

मिली

भगऊँ पए कंधु गरीब जो

दियो बरे कींअ तूफाननि में।

शरमु

हया सभु विकिणी खाधऊँ

छा

अजु बाकी इंसाननि में।

दिसी

बेसुरा राग वधी आ

मायूसी

ग़ज़लुनि-गाननि में।

पहिंजनि

खे दई धिको ‘कल्पना’

धिकिजे

jhagado

thyo ghar je bhaandani men

·

ghar

pahutaa hotal-maalani men

·

wasino

huyuni sukal dharateea te

·

kakar

wasyaa par poor nandini men

·

maanu

n kari neelaamu asaanjo

·

teri

kaang toon disee kunani men

·

milee

bhagaoon pae kandhu gareeb jo

·

diyo bare keen toophaanani men

·

sharamu

hayaa sabhu wikinee khaadhaoon

·

chaa

aju baakee insaanani men

·

disee

besuraa raag wadhee aa

·

maayoosee

gazaluni-gaanani men

·

pahinjani

khe daee dhiko ‘kalpanaa’

dhikije

झगड़ो

थ्यो घर जे भाँडनि में।

घर

पहुता होटल-मालनि में।

वसिणो

हुयुनि सुकल धरतीअ ते

ककर

वस्या पर पूर नंदिनि में।

मानु

न करि नीलामु असाँजो

टेरि

काँग तूँ दिसी कुननि में।

मिली

भगऊँ पए कंधु गरीब जो

दियो बरे कींअ तूफाननि में।

शरमु

हया सभु विकिणी खाधऊँ

छा

अजु बाकी इंसाननि में।

दिसी

बेसुरा राग वधी आ

मायूसी

ग़ज़लुनि-गाननि में।

पहिंजनि

खे दई धिको ‘कल्पना’

धिकिजे

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗