कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३३ / ५२ № 33 of 52 रचना ३३ / ५२
१९ अगस्त २०१६ 19 August 2016 १९ अगस्त २०१६

हू साथी घुरिजे hoo saathee ghurije हू साथी घुरिजे

मूँखे

हर-पलि प्यारु करे, हू साथी घुरिजे।

मुहिंजी

हिक-हिक गाल्हि मञे, हू साथी घुरिजे।

माँ

न निभाए सघंदसि हुन जे वदे कुटुंब साँ

छदे

कुटुंबु मूँ साणु रहे, हू साथी घुरिजे।

नंढा-वदा कम रधिणु-पचाइणु माँ छा जाणा

हिकु

नौकरु दींह-राति रखे, हू साथी घुरिजे।

करे

न सघंदसि माँ त गुलामी, साफ़ु चवाँ थी

लेकिन

मूहिंजे अग्याँ झुके, हू साथी घुरिजे।

कावड़ि

कयाँ अगर माँ,

moonkhe

har-pali pyaaru kare, hoo saathee ghurije

·

muhinjee

hik-hik gaalhi mane, hoo saathee ghurije

·

maan

n nibhaae saghandasi hun je wade kutunb saan

·

chade

kutunbu moon saanu rahe, hoo saathee ghurije

·

nandhaa-wadaa kam radhinu-pachaainu maan chaa jaanaa

·

hiku

naukaru deenh-raati rakhe, hoo saathee ghurije

·

kare

n saghandasi maan t gulaamee, saafu chawaan thee

·

lekin

moohinje agyaan jhuke, hoo saathee ghurije

·

kaawadi

kayaan agar maan,

मूँखे

हर-पलि प्यारु करे, हू साथी घुरिजे।

मुहिंजी

हिक-हिक गाल्हि मञे, हू साथी घुरिजे।

माँ

न निभाए सघंदसि हुन जे वदे कुटुंब साँ

छदे

कुटुंबु मूँ साणु रहे, हू साथी घुरिजे।

नंढा-वदा कम रधिणु-पचाइणु माँ छा जाणा

हिकु

नौकरु दींह-राति रखे, हू साथी घुरिजे।

करे

न सघंदसि माँ त गुलामी, साफ़ु चवाँ थी

लेकिन

मूहिंजे अग्याँ झुके, हू साथी घुरिजे।

कावड़ि

कयाँ अगर माँ,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗