कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३२ / ५२ № 32 of 52 रचना ३२ / ५२
१९ अगस्त २०१६ 19 August 2016 १९ अगस्त २०१६

दुआ माउ जी duaa maau jee दुआ माउ जी

सदा

सुखी हू रहँदो, जहिं वटि दुआ माउ

जी

॥

गुल

वाँगुरु प्यो ट्रिड़ंदो, जहिं वटि दुआ माउ जी

॥

कष्ट

मचाइनि शोरु मथनि खाँ हुन जे केदो

॥

ज़ोरु

न तिनि जो हलंदो, जहिं वटि दुआ माउ

जी

॥

सजी

उमिरि पई वासु कंदी हुन जे घरि बरकत

॥

मींहु प्यार जो वसंदो, जहिं वटि दुआ माउ जी

॥

पुछण

अचे जे हालु कालु पिणि हुन खाँ कहिं पलि

॥

मोटी

वापस वरंदो,

जहिं

वटि दुआ माउ जी

॥

अचनि

सवें तूफान ‘कल्पना’ हुन जे घरि, पर

sadaa

sukhee hoo rahando, jahin wati duaa maau

jee

·

gul

waanguru pyo tridando, jahin wati duaa maau jee

·

kasht

machaaini shoru mathani khaan hun je kedo

·

zoru

n tini jo halando, jahin wati duaa maau

jee

·

sajee

umiri paee waasu kandee hun je ghari barakat

·

meenhu pyaar jo wasando, jahin wati duaa maau jee

·

puchan

ache je haalu kaalu pini hun khaan kahin pali

·

motee

waapas warando,

jahin

wati duaa maau jee

·

achani

sawen toophaan ‘kalpanaa’ hun je ghari, par

सदा

सुखी हू रहँदो, जहिं वटि दुआ माउ

जी

॥

गुल

वाँगुरु प्यो ट्रिड़ंदो, जहिं वटि दुआ माउ जी

॥

कष्ट

मचाइनि शोरु मथनि खाँ हुन जे केदो

॥

ज़ोरु

न तिनि जो हलंदो, जहिं वटि दुआ माउ

जी

॥

सजी

उमिरि पई वासु कंदी हुन जे घरि बरकत

॥

मींहु प्यार जो वसंदो, जहिं वटि दुआ माउ जी

॥

पुछण

अचे जे हालु कालु पिणि हुन खाँ कहिं पलि

॥

मोटी

वापस वरंदो,

जहिं

वटि दुआ माउ जी

॥

अचनि

सवें तूफान ‘कल्पना’ हुन जे घरि, पर

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗