कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १३५ / २०४ № 135 of 204 रचना १३५ / २०४
१९ अगस्त २०१६ 19 August 2016 १९ अगस्त २०१६

रक्षा-बंधन पर्व मनाने सावन आया rakshaa-bandhan parv manaane saawan aayaa रक्षा-बंधन पर्व मनाने सावन आया

रसमय स्नेह-सुधा बरसाने, सावन आया

रक्षाबंधन पर्व मनाने, सावन आया

पीहर से पिय घर तक स्नेहिल-सेतु बनाकर

बहनों का सम्मान बढ़ाने, सावन आया

बोल रही रस घोल कान में, हवा बहन के

चलो मायके रंग जमाने, सावन आया

अहं-तिमिर से आब खो चुके बुझे दिलों में

पावनता की ज्योत जगाने, सावन आया

झूम रहा हर पेड़, देख पाँतें झूलों की

डाल-डाल पर पींग बढ़ाने, सावन आया

मचल रही पग-हाथ रचाने, हिना, बहन के

पायल-धुन पर गीत सुनाने, सावन आया

राखी बँधी कलाई-कर से हम बहनों को

नेह-नेग अधिकार दिलाने, सावन आया

टूट रहे जो आज ‘कल्पना’ पावन रिश्ते

उनमें फिर से गाँठ लगाने, सावन आया

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

rasamay sneh-sudhaa barasaane, saawan aayaa

rakshaabandhan parv manaane, saawan aayaa

·

peehar se piy ghar tak snehil-setu banaakar

bahanon kaa sammaan bढ़aane, saawan aayaa

·

bol rahee ras ghol kaan men, hawaa bahan ke

chalo maayake rang jamaane, saawan aayaa

·

ahan-timir se aab kho chuke bujhe dilon men

paawanataa kee jyot jagaane, saawan aayaa

·

jhoom rahaa har ped, dekh paanten jhoolon kee

daal-daal par peeng bढ़aane, saawan aayaa

·

machal rahee pag-haath rachaane, hinaa, bahan ke

paayal-dhun par geet sunaane, saawan aayaa

·

raakhee bandhee kalaaee-kar se ham bahanon ko

neh-neg adhikaar dilaane, saawan aayaa

·

toot rahe jo aaj ‘kalpanaa’ paawan rishte

·

unamen phir se gaanth lagaane, saawan aayaa

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

रसमय स्नेह-सुधा बरसाने, सावन आया

रक्षाबंधन पर्व मनाने, सावन आया

पीहर से पिय घर तक स्नेहिल-सेतु बनाकर

बहनों का सम्मान बढ़ाने, सावन आया

बोल रही रस घोल कान में, हवा बहन के

चलो मायके रंग जमाने, सावन आया

अहं-तिमिर से आब खो चुके बुझे दिलों में

पावनता की ज्योत जगाने, सावन आया

झूम रहा हर पेड़, देख पाँतें झूलों की

डाल-डाल पर पींग बढ़ाने, सावन आया

मचल रही पग-हाथ रचाने, हिना, बहन के

पायल-धुन पर गीत सुनाने, सावन आया

राखी बँधी कलाई-कर से हम बहनों को

नेह-नेग अधिकार दिलाने, सावन आया

टूट रहे जो आज ‘कल्पना’ पावन रिश्ते

उनमें फिर से गाँठ लगाने, सावन आया

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗