कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १७ / २०५ № 17 of 205 रचना १७ / २०५
९ सितम्बर २०१३ 9 September 2013 ९ सितम्बर २०१३

मंगल मूरत गणपति देवा mangal moorat ganapati dewaa मंगल मूरत गणपति देवा

देवों

में जो पूज्य प्रथम है, शीघ्र सँवारे सबके काम।

॥

मंगल

मूरत गणपति देवा,

है वो पावन प्यारा नाम।

॥

भक्ति

भरा हर मन हो जाता,

भादों शुक्ल चतुर्थी पर

॥

सुंदर

सौम्य सजी प्रतिमा से, हर

घर बन जाता है धाम।

॥

भोग

लगाकर पूजा होती,

व्रत उपवास किए जाते

॥

गणपति

जी की गाई जाती, आरति मन से सुबहो शाम।

॥

चल

पड़ती जब सजकर झाँकी, ढोल

मँजीरे साथ लिए

॥

झूम

उठता यौवन मस्ती में,

सड़कों पर लग जाता जाम।

॥

फिर

फिर से हर साल विराजें, देव, यही अभिलाषा है

॥

विनती

हो स्वीकार हमारी, करते

बारम्बार प्रणाम।

॥

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

dewon

men jo poojy pratham hai, sheeghr sanvaare sabake kaam

·

mangal

moorat ganapati dewaa,

hai wo paawan pyaaraa naam

·

bhakti

bharaa har man ho jaataa,

bhaadon shukl chaturthee par

·

sundar

saumy sajee pratimaa se, har

ghar ban jaataa hai dhaam

·

bhog

lagaakar poojaa hotee,

wrat upawaas kie jaate

·

ganapati

jee kee gaaee jaatee, aarati man se subaho shaam

·

chal

padatee jab sajakar jhaankee, dhol

manjeere saath lie

·

jhoom

uthataa yauwan mastee men,

sadakon par lag jaataa jaam

·

phir

phir se har saal wiraajen, dew, yahee abhilaashaa hai

·

winatee

ho sveekaar hamaaree, karate

baarambaar pranaam

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

देवों

में जो पूज्य प्रथम है, शीघ्र सँवारे सबके काम।

॥

मंगल

मूरत गणपति देवा,

है वो पावन प्यारा नाम।

॥

भक्ति

भरा हर मन हो जाता,

भादों शुक्ल चतुर्थी पर

॥

सुंदर

सौम्य सजी प्रतिमा से, हर

घर बन जाता है धाम।

॥

भोग

लगाकर पूजा होती,

व्रत उपवास किए जाते

॥

गणपति

जी की गाई जाती, आरति मन से सुबहो शाम।

॥

चल

पड़ती जब सजकर झाँकी, ढोल

मँजीरे साथ लिए

॥

झूम

उठता यौवन मस्ती में,

सड़कों पर लग जाता जाम।

॥

फिर

फिर से हर साल विराजें, देव, यही अभिलाषा है

॥

विनती

हो स्वीकार हमारी, करते

बारम्बार प्रणाम।

॥

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗