कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६ / २०४ № 16 of 204 रचना १६ / २०४
९ सितम्बर २०१३ 9 September 2013 ९ सितम्बर २०१३

मंगल मूरत गणपति देवा mangal moorat ganapati dewaa मंगल मूरत गणपति देवा

देवों

में जो पूज्य प्रथम है, शीघ्र सँवारे सबके काम।

मंगल

मूरत गणपति देवा,

है वो पावन प्यारा नाम।

भक्ति

भरा हर मन हो जाता,

भादों शुक्ल चतुर्थी पर

सुंदर

सौम्य सजी प्रतिमा से, हर

घर बन जाता है धाम।

भोग

लगाकर पूजा होती,

व्रत उपवास किए जाते

गणपति

जी की गाई जाती, आरति मन से सुबहो शाम।

चल

पड़ती जब सजकर झाँकी, ढोल

मँजीरे साथ लिए

झूम

उठता यौवन मस्ती में,

सड़कों पर लग जाता जाम।

फिर

फिर से हर साल विराजें, देव, यही अभिलाषा है

विनती

हो स्वीकार हमारी, करते

बारम्बार प्रणाम।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

dewon

men jo poojy pratham hai, sheeghr sanvaare sabake kaam

·

mangal

moorat ganapati dewaa,

hai wo paawan pyaaraa naam

·

bhakti

bharaa har man ho jaataa,

bhaadon shukl chaturthee par

·

sundar

saumy sajee pratimaa se, har

ghar ban jaataa hai dhaam

·

bhog

lagaakar poojaa hotee,

wrat upawaas kie jaate

·

ganapati

jee kee gaaee jaatee, aarati man se subaho shaam

·

chal

padatee jab sajakar jhaankee, dhol

manjeere saath lie

·

jhoom

uthataa yauwan mastee men,

sadakon par lag jaataa jaam

·

phir

phir se har saal wiraajen, dew, yahee abhilaashaa hai

·

winatee

ho sveekaar hamaaree, karate

baarambaar pranaam

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

देवों

में जो पूज्य प्रथम है, शीघ्र सँवारे सबके काम।

मंगल

मूरत गणपति देवा,

है वो पावन प्यारा नाम।

भक्ति

भरा हर मन हो जाता,

भादों शुक्ल चतुर्थी पर

सुंदर

सौम्य सजी प्रतिमा से, हर

घर बन जाता है धाम।

भोग

लगाकर पूजा होती,

व्रत उपवास किए जाते

गणपति

जी की गाई जाती, आरति मन से सुबहो शाम।

चल

पड़ती जब सजकर झाँकी, ढोल

मँजीरे साथ लिए

झूम

उठता यौवन मस्ती में,

सड़कों पर लग जाता जाम।

फिर

फिर से हर साल विराजें, देव, यही अभिलाषा है

विनती

हो स्वीकार हमारी, करते

बारम्बार प्रणाम।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗