कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २६ / ६५ № 26 of 65 रचना २६ / ६५
७ सितम्बर २०१३ 7 September 2013 ७ सितम्बर २०१३

कर में बसते देवता kar men basate dewataa कर में बसते देवता

कर में बसते देवता, कर दर्शन नित प्रात

एक नए संकल्प से

दिन की हो शुरुवात।

कर दाता, कर दीन भी, जैसा करें प्रयोग।

छिपा हुआ हर हाथ

में,

सुख दुख का संजोग।

दिखलाती हर रेख

है,

जीवन की तस्वीर।

अपने हाथ सँवार

लें,

खुद अपनी तकदीर।

अपनेपन से है

बड़ा,

भाव न दूजा कोय।

हाथ मिलें तो

गैर भी, पल में अपना होय।

गुस्से

में जब कर उठे, मन

हो जाता खिन्न।

kar men basate dewataa, kar darshan nit praat

·

ek nae sankalp se

din kee ho shuruwaat

·

kar daataa, kar deen bhee, jaisaa karen prayog

·

chipaa huaa har haath

men,

sukh dukh kaa sanjog

·

dikhalaatee har rekh

hai,

jeewan kee tasveer

·

apane haath sanvaar

len,

khud apanee takadeer

·

apanepan se hai

badaa,

bhaaw n doojaa koy

·

haath milen to

gair bhee, pal men apanaa hoy

·

gusse

men jab kar uthe, man

ho jaataa khinn

कर में बसते देवता, कर दर्शन नित प्रात

एक नए संकल्प से

दिन की हो शुरुवात।

कर दाता, कर दीन भी, जैसा करें प्रयोग।

छिपा हुआ हर हाथ

में,

सुख दुख का संजोग।

दिखलाती हर रेख

है,

जीवन की तस्वीर।

अपने हाथ सँवार

लें,

खुद अपनी तकदीर।

अपनेपन से है

बड़ा,

भाव न दूजा कोय।

हाथ मिलें तो

गैर भी, पल में अपना होय।

गुस्से

में जब कर उठे, मन

हो जाता खिन्न।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗