कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २७ / ६७ № 27 of 67 रचना २७ / ६७
७ सितम्बर २०१३ 7 September 2013 ७ सितम्बर २०१३

कर में बसते देवता kar men basate dewataa कर में बसते देवता

कर में बसते देवता, कर दर्शन नित प्रात

॥

एक नए संकल्प से

दिन की हो शुरुवात।

॥

कर दाता, कर दीन भी, जैसा करें प्रयोग।

॥

छिपा हुआ हर हाथ

में,

सुख दुख का संजोग।

॥

दिखलाती हर रेख

है,

जीवन की तस्वीर।

॥

अपने हाथ सँवार

लें,

खुद अपनी तकदीर।

॥

अपनेपन से है

बड़ा,

भाव न दूजा कोय।

॥

हाथ मिलें तो

गैर भी, पल में अपना होय।

॥

गुस्से

में जब कर उठे, मन

हो जाता खिन्न।

kar men basate dewataa, kar darshan nit praat

·

ek nae sankalp se

din kee ho shuruwaat

·

kar daataa, kar deen bhee, jaisaa karen prayog

·

chipaa huaa har haath

men,

sukh dukh kaa sanjog

·

dikhalaatee har rekh

hai,

jeewan kee tasveer

·

apane haath sanvaar

len,

khud apanee takadeer

·

apanepan se hai

badaa,

bhaaw n doojaa koy

·

haath milen to

gair bhee, pal men apanaa hoy

·

gusse

men jab kar uthe, man

ho jaataa khinn

कर में बसते देवता, कर दर्शन नित प्रात

॥

एक नए संकल्प से

दिन की हो शुरुवात।

॥

कर दाता, कर दीन भी, जैसा करें प्रयोग।

॥

छिपा हुआ हर हाथ

में,

सुख दुख का संजोग।

॥

दिखलाती हर रेख

है,

जीवन की तस्वीर।

॥

अपने हाथ सँवार

लें,

खुद अपनी तकदीर।

॥

अपनेपन से है

बड़ा,

भाव न दूजा कोय।

॥

हाथ मिलें तो

गैर भी, पल में अपना होय।

॥

गुस्से

में जब कर उठे, मन

हो जाता खिन्न।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗