कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ३५ / १६४ № 35 of 164 रचना ३५ / १६४
७ सितम्बर २०१३ 7 September 2013 ७ सितम्बर २०१३

सुनो स्वदेश प्रेमियो suno svadesh premiyo सुनो स्वदेश प्रेमियो

सुनो स्वदेश प्रेमियों, भुला न दो अतीत को।

॥

बुझे कभी न वो दिया, जला गए शहीद जो।

॥

लिखे अनेक पृष्ठ हैं, जवानियों के रक्त से।

॥

कि पत्थरों पे लेख हैं, खुदे कठोर सत्य से।

॥

मिटी नहीं कहानियाँ, सुभाष की, प्रताप की।

॥

बची हुई निशानियाँ, अनेक इंकलाब की।

॥

कि याद भक्ति भाव से, करो हरेक वीर को।

॥

बुझे कभी न वो दिया, जला गए शहीद जो।

॥

शहीद वे महान थे,

suno svadesh premiyon, bhulaa n do ateet ko

·

bujhe kabhee n wo diyaa, jalaa gae shaheed jo

·

likhe anek priishth hain, jawaaniyon ke rakt se

·

ki pattharon pe lekh hain, khude kathor saty se

·

mitee naheen kahaaniyaan, subhaash kee, prataap kee

·

bachee huee nishaaniyaan, anek inkalaab kee

·

ki yaad bhakti bhaaw se, karo harek weer ko

·

bujhe kabhee n wo diyaa, jalaa gae shaheed jo

·

shaheed we mahaan the,

सुनो स्वदेश प्रेमियों, भुला न दो अतीत को।

॥

बुझे कभी न वो दिया, जला गए शहीद जो।

॥

लिखे अनेक पृष्ठ हैं, जवानियों के रक्त से।

॥

कि पत्थरों पे लेख हैं, खुदे कठोर सत्य से।

॥

मिटी नहीं कहानियाँ, सुभाष की, प्रताप की।

॥

बची हुई निशानियाँ, अनेक इंकलाब की।

॥

कि याद भक्ति भाव से, करो हरेक वीर को।

॥

बुझे कभी न वो दिया, जला गए शहीद जो।

॥

शहीद वे महान थे,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗