कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ३५ / १६३ № 35 of 163 रचना ३५ / १६३
७ सितम्बर २०१३ 7 September 2013 ७ सितम्बर २०१३

सुनो स्वदेश प्रेमियो suno svadesh premiyo सुनो स्वदेश प्रेमियो

सुनो स्वदेश प्रेमियों, भुला न दो अतीत को।

बुझे कभी न वो दिया, जला गए शहीद जो।

लिखे अनेक पृष्ठ हैं, जवानियों के रक्त से।

कि पत्थरों पे लेख हैं, खुदे कठोर सत्य से।

मिटी नहीं कहानियाँ, सुभाष की, प्रताप की।

बची हुई निशानियाँ, अनेक इंकलाब की।

कि याद भक्ति भाव से, करो हरेक वीर को।

बुझे कभी न वो दिया, जला गए शहीद जो।

शहीद वे महान थे,

suno svadesh premiyon, bhulaa n do ateet ko

·

bujhe kabhee n wo diyaa, jalaa gae shaheed jo

·

likhe anek priishth hain, jawaaniyon ke rakt se

·

ki pattharon pe lekh hain, khude kathor saty se

·

mitee naheen kahaaniyaan, subhaash kee, prataap kee

·

bachee huee nishaaniyaan, anek inkalaab kee

·

ki yaad bhakti bhaaw se, karo harek weer ko

·

bujhe kabhee n wo diyaa, jalaa gae shaheed jo

·

shaheed we mahaan the,

सुनो स्वदेश प्रेमियों, भुला न दो अतीत को।

बुझे कभी न वो दिया, जला गए शहीद जो।

लिखे अनेक पृष्ठ हैं, जवानियों के रक्त से।

कि पत्थरों पे लेख हैं, खुदे कठोर सत्य से।

मिटी नहीं कहानियाँ, सुभाष की, प्रताप की।

बची हुई निशानियाँ, अनेक इंकलाब की।

कि याद भक्ति भाव से, करो हरेक वीर को।

बुझे कभी न वो दिया, जला गए शहीद जो।

शहीद वे महान थे,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗