कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २६ / ६७ № 26 of 67 रचना २६ / ६७
६ सितम्बर २०१३ 6 September 2013 ६ सितम्बर २०१३

माँ सम हिन्दी भारती maan sam hindee bhaaratee माँ सम हिन्दी भारती

माँ सम हिन्दी

भारती, आँचल में भर प्यार।

॥

चली विजय-रथ वाहिनी, सात समंदर पार।

॥

सकल भाव इस ह्रदय के, हिन्दी पर कुर्बान।

॥

हिन्दी से ही आज है, मेरा देश महान।

॥

इतनी सरला सहज है, क्या क्या करूँ बखान।

॥

अमृत रस की धार सा, इसका छंद विधान।

॥

जिस विध लिखें, पढ़ें वही, कहीं नहीं

अटकाव।

॥

जितना प्यारा नाम है, उतने सुंदर भाव।

॥

हिन्दी की ही गूँज हो, ऐसा

maan sam hindee

bhaaratee, aanchal men bhar pyaar

·

chalee wijay-rath waahinee, saat samandar paar

·

sakal bhaaw is hraday ke, hindee par kurbaan

·

hindee se hee aaj hai, meraa desh mahaan

·

itanee saralaa sahaj hai, kyaa kyaa karoon bakhaan

·

amriit ras kee dhaar saa, isakaa chand widhaan

·

jis widh likhen, pढ़en wahee, kaheen naheen

atakaaw

·

jitanaa pyaaraa naam hai, utane sundar bhaaw

·

hindee kee hee goonj ho, aisaa

माँ सम हिन्दी

भारती, आँचल में भर प्यार।

॥

चली विजय-रथ वाहिनी, सात समंदर पार।

॥

सकल भाव इस ह्रदय के, हिन्दी पर कुर्बान।

॥

हिन्दी से ही आज है, मेरा देश महान।

॥

इतनी सरला सहज है, क्या क्या करूँ बखान।

॥

अमृत रस की धार सा, इसका छंद विधान।

॥

जिस विध लिखें, पढ़ें वही, कहीं नहीं

अटकाव।

॥

जितना प्यारा नाम है, उतने सुंदर भाव।

॥

हिन्दी की ही गूँज हो, ऐसा

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗