कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २५ / ६५ № 25 of 65 रचना २५ / ६५
६ सितम्बर २०१३ 6 September 2013 ६ सितम्बर २०१३

माँ सम हिन्दी भारती maan sam hindee bhaaratee माँ सम हिन्दी भारती

माँ सम हिन्दी

भारती, आँचल में भर प्यार।

चली विजय-रथ वाहिनी, सात समंदर पार।

सकल भाव इस ह्रदय के, हिन्दी पर कुर्बान।

हिन्दी से ही आज है, मेरा देश महान।

इतनी सरला सहज है, क्या क्या करूँ बखान।

अमृत रस की धार सा, इसका छंद विधान।

जिस विध लिखें, पढ़ें वही, कहीं नहीं

अटकाव।

जितना प्यारा नाम है, उतने सुंदर भाव।

हिन्दी की ही गूँज हो, ऐसा

maan sam hindee

bhaaratee, aanchal men bhar pyaar

·

chalee wijay-rath waahinee, saat samandar paar

·

sakal bhaaw is hraday ke, hindee par kurbaan

·

hindee se hee aaj hai, meraa desh mahaan

·

itanee saralaa sahaj hai, kyaa kyaa karoon bakhaan

·

amriit ras kee dhaar saa, isakaa chand widhaan

·

jis widh likhen, pढ़en wahee, kaheen naheen

atakaaw

·

jitanaa pyaaraa naam hai, utane sundar bhaaw

·

hindee kee hee goonj ho, aisaa

माँ सम हिन्दी

भारती, आँचल में भर प्यार।

चली विजय-रथ वाहिनी, सात समंदर पार।

सकल भाव इस ह्रदय के, हिन्दी पर कुर्बान।

हिन्दी से ही आज है, मेरा देश महान।

इतनी सरला सहज है, क्या क्या करूँ बखान।

अमृत रस की धार सा, इसका छंद विधान।

जिस विध लिखें, पढ़ें वही, कहीं नहीं

अटकाव।

जितना प्यारा नाम है, उतने सुंदर भाव।

हिन्दी की ही गूँज हो, ऐसा

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗