कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ३६ / १६३ № 36 of 163 रचना ३६ / १६३
१२ सितम्बर २०१३ 12 September 2013 १२ सितम्बर २०१३

जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी jangal cheekhaa chalee kulhaadee जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी

जंगल

चीखा चली कुल्हाड़ी

चुन

चुन पेड़ चीरती आरी

कल

उसकी अब इसकी बारी

पंछी

नीड़ यहाँ मत बाँधो।

यहाँ

नहीं अधिकार तुम्हारा

तिनके

तुम क्यों लेकर आए।

और

नहीं दी घूस किसी को

तुम्हें

सुरक्षा कौन दिलाए।

अगर

हो गए घायल चूज़े

क्या

होगा फिर साधो! साधो!

गाँव

नहीं, यह शहर बंधुवर

कहर

वनों पर आ टूटा है।

क्रूर

कुटिलतम इन्सानों ने

वन

जीवों का घर लूटा है।

जारी

है चहुं ओर अतिक्रमण

निपट

अकेले तुम हो

jangal

cheekhaa chalee kulhaadee

chun

chun ped cheeratee aaree

kal

usakee ab isakee baaree

panchee

need yahaan mat baandho

·

yahaan

naheen adhikaar tumhaaraa

tinake

tum kyon lekar aae

aur

naheen dee ghoos kisee ko

tumhen

surakshaa kaun dilaae

·

agar

ho gae ghaayal chooze

kyaa

hogaa phir saadho! saadho!

·

gaanv

naheen, yah shahar bandhuwar

kahar

wanon par aa tootaa hai

kroor

kutilatam insaanon ne

wan

jeewon kaa ghar lootaa hai

·

jaaree

hai chahun or atikraman

nipat

akele tum ho

जंगल

चीखा चली कुल्हाड़ी

चुन

चुन पेड़ चीरती आरी

कल

उसकी अब इसकी बारी

पंछी

नीड़ यहाँ मत बाँधो।

यहाँ

नहीं अधिकार तुम्हारा

तिनके

तुम क्यों लेकर आए।

और

नहीं दी घूस किसी को

तुम्हें

सुरक्षा कौन दिलाए।

अगर

हो गए घायल चूज़े

क्या

होगा फिर साधो! साधो!

गाँव

नहीं, यह शहर बंधुवर

कहर

वनों पर आ टूटा है।

क्रूर

कुटिलतम इन्सानों ने

वन

जीवों का घर लूटा है।

जारी

है चहुं ओर अतिक्रमण

निपट

अकेले तुम हो

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗