पहला प्यार हिन्दी pahalaa pyaar hindee पहला प्यार हिन्दी
जूझती थी बेड़ियों से, जो कभी लाचार हिन्दी।
उड़ रही पाखी बनी वो, सात सागर पार हिन्दी।
कोख से संस्कृत के जन्मी, कोश संस्कृति का रचाया।
संस्कारों को जनम दे, कर रही उपकार हिन्दी।
जान लें कानूनविद, शासन पुरोधा, राज नेता।
राज में औ काज में है, आदि से हक़दार हिन्दी।
जो गुलामी दे गए थे, क्यों सलामी दें उन्हें हम?
क्यों उन्हें सौंपें वतन, जिनको नहीं स्वीकार हिन्दी।
जो करे विद्रोह, द्रोही, देश का उसको कहेंगे।
हाथ में लेकर रहेगी, अब सकल अधिकार हिन्दी।
है यही ताकत हमारे, स्वत्व की, स्वाधीनता की।
काटने बाधाओं को, बन जाएगी तलवार हिन्दी।
मान हर भाषा को देता, यह सदय भारत हमारा।
पर ज़रूरी है करें स्वीकार सब साभार हिन्दी।
क्या नहीं होता कलम से, ठान लें जो आप मित्रो!
अब कलम हर हाथ में हो, साथ पैनी धार हिन्दी।
आज अपनी भारती पर, नाज़ भारत वासियों को
हो चुकी भारत के जन-गण, मन का पहला प्यार हिन्दी
-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
joojhatee thee bediyon se, jo kabhee laachaar hindee
ud rahee paakhee banee wo, saat saagar paar hindee
kokh se sanskriit ke janmee, kosh sanskriiti kaa rachaayaa
sanskaaron ko janam de, kar rahee upakaar hindee
jaan len kaanoonawid, shaasan purodhaa, raaj netaa
raaj men au kaaj men hai, aadi se haqadaar hindee
jo gulaamee de gae the, kyon salaamee den unhen ham?
kyon unhen saunpen watan, jinako naheen sveekaar hindee
jo kare widroh, drohee, desh kaa usako kahenge
haath men lekar rahegee, ab sakal adhikaar hindee
hai yahee taakat hamaare, svatv kee, svaadheenataa kee
kaatane baadhaaon ko, ban jaaegee talawaar hindee
maan har bhaashaa ko detaa, yah saday bhaarat hamaaraa
par zarooree hai karen sveekaar sab saabhaar hindee
kyaa naheen hotaa kalam se, thaan len jo aap mitro!
ab kalam har haath men ho, saath painee dhaar hindee
aaj apanee bhaaratee par, naaz bhaarat waasiyon ko
ho chukee bhaarat ke jan-gan, man kaa pahalaa pyaar hindee
-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
जूझती थी बेड़ियों से, जो कभी लाचार हिन्दी।
उड़ रही पाखी बनी वो, सात सागर पार हिन्दी।
कोख से संस्कृत के जन्मी, कोश संस्कृति का रचाया।
संस्कारों को जनम दे, कर रही उपकार हिन्दी।
जान लें कानूनविद, शासन पुरोधा, राज नेता।
राज में औ काज में है, आदि से हक़दार हिन्दी।
जो गुलामी दे गए थे, क्यों सलामी दें उन्हें हम?
क्यों उन्हें सौंपें वतन, जिनको नहीं स्वीकार हिन्दी।
जो करे विद्रोह, द्रोही, देश का उसको कहेंगे।
हाथ में लेकर रहेगी, अब सकल अधिकार हिन्दी।
है यही ताकत हमारे, स्वत्व की, स्वाधीनता की।
काटने बाधाओं को, बन जाएगी तलवार हिन्दी।
मान हर भाषा को देता, यह सदय भारत हमारा।
पर ज़रूरी है करें स्वीकार सब साभार हिन्दी।
क्या नहीं होता कलम से, ठान लें जो आप मित्रो!
अब कलम हर हाथ में हो, साथ पैनी धार हिन्दी।
आज अपनी भारती पर, नाज़ भारत वासियों को
हो चुकी भारत के जन-गण, मन का पहला प्यार हिन्दी
-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
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-कल्पना रामानी