कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १८ / २०५ № 18 of 205 रचना १८ / २०५
१४ सितम्बर २०१३ 14 September 2013 १४ सितम्बर २०१३

पहला प्यार हिन्दी pahalaa pyaar hindee पहला प्यार हिन्दी

जूझती थी बेड़ियों से, जो कभी लाचार हिन्दी।

॥

उड़ रही पाखी बनी वो, सात सागर पार हिन्दी।

॥

कोख से संस्कृत के जन्मी, कोश संस्कृति का रचाया।

संस्कारों को जनम दे, कर रही उपकार हिन्दी।

॥

जान लें कानूनविद, शासन पुरोधा, राज नेता।

राज में औ काज में है, आदि से हक़दार हिन्दी।

॥

जो गुलामी दे गए थे, क्यों सलामी दें उन्हें हम?

क्यों उन्हें सौंपें वतन, जिनको नहीं स्वीकार हिन्दी।

॥

जो करे विद्रोह, द्रोही, देश का उसको कहेंगे।

हाथ में लेकर रहेगी, अब सकल अधिकार हिन्दी।

॥

है यही ताकत हमारे, स्वत्व की, स्वाधीनता की।

काटने बाधाओं को, बन जाएगी तलवार हिन्दी।

॥

मान हर भाषा को देता, यह सदय भारत हमारा।

पर ज़रूरी है करें स्वीकार सब साभार हिन्दी।

॥

क्या नहीं होता कलम से, ठान लें जो आप मित्रो!

अब कलम हर हाथ में हो, साथ पैनी धार हिन्दी।

॥

आज अपनी भारती पर, नाज़ भारत वासियों को

॥

हो चुकी भारत के जन-गण, मन का पहला प्यार हिन्दी

॥

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

joojhatee thee bediyon se, jo kabhee laachaar hindee

·

ud rahee paakhee banee wo, saat saagar paar hindee

·

kokh se sanskriit ke janmee, kosh sanskriiti kaa rachaayaa

sanskaaron ko janam de, kar rahee upakaar hindee

·

jaan len kaanoonawid, shaasan purodhaa, raaj netaa

raaj men au kaaj men hai, aadi se haqadaar hindee

·

jo gulaamee de gae the, kyon salaamee den unhen ham?

kyon unhen saunpen watan, jinako naheen sveekaar hindee

·

jo kare widroh, drohee, desh kaa usako kahenge

haath men lekar rahegee, ab sakal adhikaar hindee

·

hai yahee taakat hamaare, svatv kee, svaadheenataa kee

kaatane baadhaaon ko, ban jaaegee talawaar hindee

·

maan har bhaashaa ko detaa, yah saday bhaarat hamaaraa

par zarooree hai karen sveekaar sab saabhaar hindee

·

kyaa naheen hotaa kalam se, thaan len jo aap mitro!

ab kalam har haath men ho, saath painee dhaar hindee

·

aaj apanee bhaaratee par, naaz bhaarat waasiyon ko

·

ho chukee bhaarat ke jan-gan, man kaa pahalaa pyaar hindee

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जूझती थी बेड़ियों से, जो कभी लाचार हिन्दी।

॥

उड़ रही पाखी बनी वो, सात सागर पार हिन्दी।

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कोख से संस्कृत के जन्मी, कोश संस्कृति का रचाया।

संस्कारों को जनम दे, कर रही उपकार हिन्दी।

॥

जान लें कानूनविद, शासन पुरोधा, राज नेता।

राज में औ काज में है, आदि से हक़दार हिन्दी।

॥

जो गुलामी दे गए थे, क्यों सलामी दें उन्हें हम?

क्यों उन्हें सौंपें वतन, जिनको नहीं स्वीकार हिन्दी।

॥

जो करे विद्रोह, द्रोही, देश का उसको कहेंगे।

हाथ में लेकर रहेगी, अब सकल अधिकार हिन्दी।

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है यही ताकत हमारे, स्वत्व की, स्वाधीनता की।

काटने बाधाओं को, बन जाएगी तलवार हिन्दी।

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मान हर भाषा को देता, यह सदय भारत हमारा।

पर ज़रूरी है करें स्वीकार सब साभार हिन्दी।

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क्या नहीं होता कलम से, ठान लें जो आप मित्रो!

अब कलम हर हाथ में हो, साथ पैनी धार हिन्दी।

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आज अपनी भारती पर, नाज़ भारत वासियों को

॥

हो चुकी भारत के जन-गण, मन का पहला प्यार हिन्दी

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-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗