कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ३८ / ६३ № 38 of 63 रचना ३८ / ६३
१९ सितम्बर २०१३ 19 September 2013 १९ सितम्बर २०१३

माँ पूजा माँ आरती maan poojaa maan aaratee माँ पूजा माँ आरती

माँ

पूजा, माँ

आरती, माँ

को मानें ईश।

आँचल

में अमृत भरा, मुख पर शुभ आशीष।

मुख

पर शुभ आशीष, भरी ममता से झोली

दुख

लेकर सुख बाँट, बहुत खुश होती भोली।

कहनी इतनी बात, जानिए माँ की

महिमा

प्रातः

का यह मंत्र, वेद सी पावन है माँ!

माँ

की ममता में निहित, यह अनंत आकाश।

गहराई

है नीर सी, जगमग सूर्य प्रकाश।

जगमग

सूर्य प्रकाश, स्वर्ग है यह धरती का

अगर

न इसकी ओट, दिखेगा हर सुख फीका।

maan

poojaa, maan

aaratee, maan

ko maanen eesh

·

aanchal

men amriit bharaa, mukh par shubh aasheesh

·

mukh

par shubh aasheesh, bharee mamataa se jholee

·

dukh

lekar sukh baant, bahut khush hotee bholee

·

kahanee itanee baat, jaanie maan kee

mahimaa

·

praatah

kaa yah mantr, wed see paawan hai maan!

·

maan

kee mamataa men nihit, yah anant aakaash

·

gaharaaee

hai neer see, jagamag soory prakaash

·

jagamag

soory prakaash, svarg hai yah dharatee kaa

·

agar

n isakee ot, dikhegaa har sukh pheekaa

माँ

पूजा, माँ

आरती, माँ

को मानें ईश।

आँचल

में अमृत भरा, मुख पर शुभ आशीष।

मुख

पर शुभ आशीष, भरी ममता से झोली

दुख

लेकर सुख बाँट, बहुत खुश होती भोली।

कहनी इतनी बात, जानिए माँ की

महिमा

प्रातः

का यह मंत्र, वेद सी पावन है माँ!

माँ

की ममता में निहित, यह अनंत आकाश।

गहराई

है नीर सी, जगमग सूर्य प्रकाश।

जगमग

सूर्य प्रकाश, स्वर्ग है यह धरती का

अगर

न इसकी ओट, दिखेगा हर सुख फीका।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗