कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी
२५ अक्तूबर २०१९ 25 October 2019 २५ अक्तूबर २०१९
जगमग तारों से भरा jagamag taaron se bharaa जगमग तारों से भरा
कुंडलिया छंद
॥
जगमग तारों से भरा, सजा गगन का थाल।
आज अमावस रात है, लाई तम का काल।
लाई तम का काल, जले दीपक घर-घर में
और पर्व का दौर, चला हर गाँव शहर में
एक नया उल्लास, धरा पर बिखरा पग-पग
सजा गगन का थाल, भरा तारों से जगमग।
kundaliyaa chand
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jagamag taaron se bharaa, sajaa gagan kaa thaal
aaj amaawas raat hai, laaee tam kaa kaal
laaee tam kaa kaal, jale deepak ghar-ghar men
aur parv kaa daur, chalaa har gaanv shahar men
ek nayaa ullaas, dharaa par bikharaa pag-pag
sajaa gagan kaa thaal, bharaa taaron se jagamag
कुंडलिया छंद
॥
जगमग तारों से भरा, सजा गगन का थाल।
आज अमावस रात है, लाई तम का काल।
लाई तम का काल, जले दीपक घर-घर में
और पर्व का दौर, चला हर गाँव शहर में
एक नया उल्लास, धरा पर बिखरा पग-पग
सजा गगन का थाल, भरा तारों से जगमग।