कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८ / १६३ № 8 of 163 रचना ८ / १६३
१४ दिसम्बर २०१२ 14 December 2012 १४ दिसम्बर २०१२

महानगर में यौवन आया mahaanagar men yauwan aayaa महानगर में यौवन आया

ऊँची ऊँची इमारतें है,

छोटे छोटे फ्लैट।

इमारतों से भी ऊँचे हैं,

लेकिन इनके रेट।

महानगर में उड़कर

आया,

यौवन पंख लगाए।

अपने खोए, हुए

अकेले,

क्या हो अब

पछताए।

दिन भर बहे पसीना

चाहे,

भरे न फिर भी

पेट।

राजा बनकर रहे

गाँव के,

अब मजदूर शहर

में।

रहने को मजबूर हो

गए,

दड़बों जैसे घर

में।

हुक्म चलाया कभी

वहाँ पर

अब धोते

कप-प्लेट।

जीवन शैली

oonchee oonchee imaaraten hai,

chote chote phlait

imaaraton se bhee oonche hain,

lekin inake ret

·

mahaanagar men udakar

aayaa,

·

yauwan pankh lagaae

·

apane khoe, hue

akele,

·

kyaa ho ab

pachataae

·

din bhar bahe paseenaa

chaahe,

·

bhare n phir bhee

pet

·

raajaa banakar rahe

gaanv ke,

·

ab majadoor shahar

men

·

rahane ko majaboor ho

gae,

·

dadabon jaise ghar

men

·

hukm chalaayaa kabhee

wahaan par

·

ab dhote

kap-plet

·

jeewan shailee

ऊँची ऊँची इमारतें है,

छोटे छोटे फ्लैट।

इमारतों से भी ऊँचे हैं,

लेकिन इनके रेट।

महानगर में उड़कर

आया,

यौवन पंख लगाए।

अपने खोए, हुए

अकेले,

क्या हो अब

पछताए।

दिन भर बहे पसीना

चाहे,

भरे न फिर भी

पेट।

राजा बनकर रहे

गाँव के,

अब मजदूर शहर

में।

रहने को मजबूर हो

गए,

दड़बों जैसे घर

में।

हुक्म चलाया कभी

वहाँ पर

अब धोते

कप-प्लेट।

जीवन शैली

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗