महानगर में यौवन आया mahaanagar men yauwan aayaa महानगर में यौवन आया
ऊँची ऊँची इमारतें है,
छोटे छोटे फ्लैट।
इमारतों से भी ऊँचे हैं,
लेकिन इनके रेट।
महानगर में उड़कर
आया,
यौवन पंख लगाए।
अपने खोए, हुए
अकेले,
क्या हो अब
पछताए।
दिन भर बहे पसीना
चाहे,
भरे न फिर भी
पेट।
राजा बनकर रहे
गाँव के,
अब मजदूर शहर
में।
रहने को मजबूर हो
गए,
दड़बों जैसे घर
में।
हुक्म चलाया कभी
वहाँ पर
अब धोते
कप-प्लेट।
जीवन शैली
oonchee oonchee imaaraten hai,
chote chote phlait
imaaraton se bhee oonche hain,
lekin inake ret
mahaanagar men udakar
aayaa,
yauwan pankh lagaae
apane khoe, hue
akele,
kyaa ho ab
pachataae
din bhar bahe paseenaa
chaahe,
bhare n phir bhee
pet
raajaa banakar rahe
gaanv ke,
ab majadoor shahar
men
rahane ko majaboor ho
gae,
dadabon jaise ghar
men
hukm chalaayaa kabhee
wahaan par
ab dhote
kap-plet
jeewan shailee
ऊँची ऊँची इमारतें है,
छोटे छोटे फ्लैट।
इमारतों से भी ऊँचे हैं,
लेकिन इनके रेट।
महानगर में उड़कर
आया,
यौवन पंख लगाए।
अपने खोए, हुए
अकेले,
क्या हो अब
पछताए।
दिन भर बहे पसीना
चाहे,
भरे न फिर भी
पेट।
राजा बनकर रहे
गाँव के,
अब मजदूर शहर
में।
रहने को मजबूर हो
गए,
दड़बों जैसे घर
में।
हुक्म चलाया कभी
वहाँ पर
अब धोते
कप-प्लेट।
जीवन शैली