कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५ / १६४ № 15 of 164 रचना १५ / १६४
२४ अप्रैल २०१३ 24 April 2013 २४ अप्रैल २०१३

करनी का फल धरणी देगी karanee kaa phal dharanee degee करनी का फल धरणी देगी

जीवन भर जिसने दी छाया

॥

इन्सानों ने उसे मिटाया।

॥

काट काट कर डाली डाली

॥

छलनी कर दी जड़ से काया।

॥

बरगद उखड़ा, पीपल उजड़ा

॥

अमलतास ने छोड़ी आशा।

॥

सड़क किनारे, खड़े अकेले

॥

गुलमोहर को हुई हताशा।

॥

पूछ रहा कचनार काँपकर

॥

क्या दुख हमसे किसने पाया।

॥

मन ही मन हैं पेड़ सोचते

॥

सेवा का क्या यही सिला है?

॥

प्राणहवा दी, भूख मिटाई

॥

पथिको को विश्राम मिला है।

jeewan bhar jisane dee chaayaa

·

insaanon ne use mitaayaa

·

kaat kaat kar daalee daalee

·

chalanee kar dee jad se kaayaa

·

baragad ukhadaa, peepal ujadaa

·

amalataas ne chodee aashaa

·

sadak kinaare, khade akele

·

gulamohar ko huee hataashaa

·

pooch rahaa kachanaar kaanpakar

·

kyaa dukh hamase kisane paayaa

·

man hee man hain ped sochate

·

sewaa kaa kyaa yahee silaa hai?

·

praanahawaa dee, bhookh mitaaee

·

pathiko ko wishraam milaa hai

जीवन भर जिसने दी छाया

॥

इन्सानों ने उसे मिटाया।

॥

काट काट कर डाली डाली

॥

छलनी कर दी जड़ से काया।

॥

बरगद उखड़ा, पीपल उजड़ा

॥

अमलतास ने छोड़ी आशा।

॥

सड़क किनारे, खड़े अकेले

॥

गुलमोहर को हुई हताशा।

॥

पूछ रहा कचनार काँपकर

॥

क्या दुख हमसे किसने पाया।

॥

मन ही मन हैं पेड़ सोचते

॥

सेवा का क्या यही सिला है?

॥

प्राणहवा दी, भूख मिटाई

॥

पथिको को विश्राम मिला है।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗