कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५ / १६३ № 15 of 163 रचना १५ / १६३
२४ अप्रैल २०१३ 24 April 2013 २४ अप्रैल २०१३

करनी का फल धरणी देगी karanee kaa phal dharanee degee करनी का फल धरणी देगी

जीवन भर जिसने दी छाया

इन्सानों ने उसे मिटाया।

काट काट कर डाली डाली

छलनी कर दी जड़ से काया।

बरगद उखड़ा, पीपल उजड़ा

अमलतास ने छोड़ी आशा।

सड़क किनारे, खड़े अकेले

गुलमोहर को हुई हताशा।

पूछ रहा कचनार काँपकर

क्या दुख हमसे किसने पाया।

मन ही मन हैं पेड़ सोचते

सेवा का क्या यही सिला है?

प्राणहवा दी, भूख मिटाई

पथिको को विश्राम मिला है।

jeewan bhar jisane dee chaayaa

·

insaanon ne use mitaayaa

·

kaat kaat kar daalee daalee

·

chalanee kar dee jad se kaayaa

·

baragad ukhadaa, peepal ujadaa

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amalataas ne chodee aashaa

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sadak kinaare, khade akele

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gulamohar ko huee hataashaa

·

pooch rahaa kachanaar kaanpakar

·

kyaa dukh hamase kisane paayaa

·

man hee man hain ped sochate

·

sewaa kaa kyaa yahee silaa hai?

·

praanahawaa dee, bhookh mitaaee

·

pathiko ko wishraam milaa hai

जीवन भर जिसने दी छाया

इन्सानों ने उसे मिटाया।

काट काट कर डाली डाली

छलनी कर दी जड़ से काया।

बरगद उखड़ा, पीपल उजड़ा

अमलतास ने छोड़ी आशा।

सड़क किनारे, खड़े अकेले

गुलमोहर को हुई हताशा।

पूछ रहा कचनार काँपकर

क्या दुख हमसे किसने पाया।

मन ही मन हैं पेड़ सोचते

सेवा का क्या यही सिला है?

प्राणहवा दी, भूख मिटाई

पथिको को विश्राम मिला है।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗