मद्य निषेध सजा पन्नों पर mady nishedh sajaa pannon par मद्य निषेध सजा पन्नों पर
चीखें, रुदन, कराहें, आहें
घुटे हुए चौखट के अंदर।
हावी है बोतल शराब की
कितना हृदय विदारक मंजर!
गृहस्वामी का धर्म यही है
रोज़ रात का कर्म यही है।
करे दिहाड़ी, जो कुछ पाए
वो दारू की भेंट चढ़ाए।
हलक तृप्त है, मगर हो चुका
जीवन ज्यों वीराना बंजर।
भूखे बच्चे, गृहिणी पीड़ित
घर मृतपाय, मगर मय जीवित।
बर्तन भाँडे खा गई हाला
विहँस रहा है केवल प्याला।
हर चेहरे पर लटक रहा है
अनजाने
cheekhen, rudan, karaahen, aahen
ghute hue chaukhat ke andar
haawee hai botal sharaab kee
kitanaa hriiday widaarak manjar!
griihasvaamee kaa dharm yahee hai
roz raat kaa karm yahee hai
kare dihaadee, jo kuch paae
wo daaroo kee bhent chढ़aae
halak triipt hai, magar ho chukaa
jeewan jyon weeraanaa banjar
bhookhe bachche, griihinee peedit
ghar mriitapaay, magar may jeewit
bartan bhaande khaa gaee haalaa
wihans rahaa hai kewal pyaalaa
har chehare par latak rahaa hai
anajaane
चीखें, रुदन, कराहें, आहें
घुटे हुए चौखट के अंदर।
हावी है बोतल शराब की
कितना हृदय विदारक मंजर!
गृहस्वामी का धर्म यही है
रोज़ रात का कर्म यही है।
करे दिहाड़ी, जो कुछ पाए
वो दारू की भेंट चढ़ाए।
हलक तृप्त है, मगर हो चुका
जीवन ज्यों वीराना बंजर।
भूखे बच्चे, गृहिणी पीड़ित
घर मृतपाय, मगर मय जीवित।
बर्तन भाँडे खा गई हाला
विहँस रहा है केवल प्याला।
हर चेहरे पर लटक रहा है
अनजाने