कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १७ / १६३ № 17 of 163 रचना १७ / १६३
२३ मई २०१३ 23 May 2013 २३ मई २०१३

मद्य निषेध सजा पन्नों पर mady nishedh sajaa pannon par मद्य निषेध सजा पन्नों पर

चीखें, रुदन, कराहें, आहें

घुटे हुए चौखट के अंदर।

हावी है बोतल शराब की

कितना हृदय विदारक मंजर!

गृहस्वामी का धर्म यही है

रोज़ रात का कर्म यही है।

करे दिहाड़ी, जो कुछ पाए

वो दारू की भेंट चढ़ाए।

हलक तृप्त है, मगर हो चुका

जीवन ज्यों वीराना बंजर।

भूखे बच्चे, गृहिणी पीड़ित

घर मृतपाय, मगर मय जीवित।

बर्तन भाँडे खा गई हाला

विहँस रहा है केवल प्याला।

हर चेहरे पर लटक रहा है

अनजाने

cheekhen, rudan, karaahen, aahen

·

ghute hue chaukhat ke andar

·

haawee hai botal sharaab kee

·

kitanaa hriiday widaarak manjar!

·

griihasvaamee kaa dharm yahee hai

·

roz raat kaa karm yahee hai

·

kare dihaadee, jo kuch paae

·

wo daaroo kee bhent chढ़aae

·

halak triipt hai, magar ho chukaa

·

jeewan jyon weeraanaa banjar

·

bhookhe bachche, griihinee peedit

·

ghar mriitapaay, magar may jeewit

·

bartan bhaande khaa gaee haalaa

·

wihans rahaa hai kewal pyaalaa

·

har chehare par latak rahaa hai

·

anajaane

चीखें, रुदन, कराहें, आहें

घुटे हुए चौखट के अंदर।

हावी है बोतल शराब की

कितना हृदय विदारक मंजर!

गृहस्वामी का धर्म यही है

रोज़ रात का कर्म यही है।

करे दिहाड़ी, जो कुछ पाए

वो दारू की भेंट चढ़ाए।

हलक तृप्त है, मगर हो चुका

जीवन ज्यों वीराना बंजर।

भूखे बच्चे, गृहिणी पीड़ित

घर मृतपाय, मगर मय जीवित।

बर्तन भाँडे खा गई हाला

विहँस रहा है केवल प्याला।

हर चेहरे पर लटक रहा है

अनजाने

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗