कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४९ / १६३ № 49 of 163 रचना ४९ / १६३
२६ दिसम्बर २०१३ 26 December 2013 २६ दिसम्बर २०१३

शुभारंभ है नए साल का shubhaaranbh hai nae saal kaa शुभारंभ है नए साल का

फिर से नई कोपलें फूटीं

खिला गाँव का बूढ़ा बरगद।

शुभारंभ है नए साल का

सोच-सोच है मन

में गदगद

आज सामने, घर की मलिका

को उसने मुस्काते देखा।

बंद खिड़कियाँ खुलीं अचानक

चुग्गा पाकर पाखी चहका।

खिसियाकर हो गया व्योम से

कोहरा जाने कहाँ

नदारद।

खबर सुनी है उस देहरी पर

फिर अपनों के कदम पड़ेंगे।

प्यारी सी मुस्कानों के भी

कोने कोने बोल घुलेंगे।

स्वागत करने

phir se naee kopalen phooteen

·

khilaa gaanv kaa booढ़aa baragad

·

shubhaaranbh hai nae saal kaa

·

soch-soch hai man

men gadagad

·

aaj saamane, ghar kee malikaa

·

ko usane muskaate dekhaa

·

band khidakiyaan khuleen achaanak

chuggaa paakar paakhee chahakaa

·

khisiyaakar ho gayaa wyom se

koharaa jaane kahaan

nadaarad

·

khabar sunee hai us deharee par

·

phir apanon ke kadam padenge

·

pyaaree see muskaanon ke bhee

·

kone kone bol ghulenge

·

svaagat karane

फिर से नई कोपलें फूटीं

खिला गाँव का बूढ़ा बरगद।

शुभारंभ है नए साल का

सोच-सोच है मन

में गदगद

आज सामने, घर की मलिका

को उसने मुस्काते देखा।

बंद खिड़कियाँ खुलीं अचानक

चुग्गा पाकर पाखी चहका।

खिसियाकर हो गया व्योम से

कोहरा जाने कहाँ

नदारद।

खबर सुनी है उस देहरी पर

फिर अपनों के कदम पड़ेंगे।

प्यारी सी मुस्कानों के भी

कोने कोने बोल घुलेंगे।

स्वागत करने

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗