शुभारंभ है नए साल का shubhaaranbh hai nae saal kaa शुभारंभ है नए साल का
फिर से नई कोपलें फूटीं
खिला गाँव का बूढ़ा बरगद।
शुभारंभ है नए साल का
सोच-सोच है मन
में गदगद
आज सामने, घर की मलिका
को उसने मुस्काते देखा।
बंद खिड़कियाँ खुलीं अचानक
चुग्गा पाकर पाखी चहका।
खिसियाकर हो गया व्योम से
कोहरा जाने कहाँ
नदारद।
खबर सुनी है उस देहरी पर
फिर अपनों के कदम पड़ेंगे।
प्यारी सी मुस्कानों के भी
कोने कोने बोल घुलेंगे।
स्वागत करने
phir se naee kopalen phooteen
khilaa gaanv kaa booढ़aa baragad
shubhaaranbh hai nae saal kaa
soch-soch hai man
men gadagad
aaj saamane, ghar kee malikaa
ko usane muskaate dekhaa
band khidakiyaan khuleen achaanak
chuggaa paakar paakhee chahakaa
khisiyaakar ho gayaa wyom se
koharaa jaane kahaan
nadaarad
khabar sunee hai us deharee par
phir apanon ke kadam padenge
pyaaree see muskaanon ke bhee
kone kone bol ghulenge
svaagat karane
फिर से नई कोपलें फूटीं
खिला गाँव का बूढ़ा बरगद।
शुभारंभ है नए साल का
सोच-सोच है मन
में गदगद
आज सामने, घर की मलिका
को उसने मुस्काते देखा।
बंद खिड़कियाँ खुलीं अचानक
चुग्गा पाकर पाखी चहका।
खिसियाकर हो गया व्योम से
कोहरा जाने कहाँ
नदारद।
खबर सुनी है उस देहरी पर
फिर अपनों के कदम पड़ेंगे।
प्यारी सी मुस्कानों के भी
कोने कोने बोल घुलेंगे।
स्वागत करने