कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५० / १६३ № 50 of 163 रचना ५० / १६३
३० दिसम्बर २०१३ 30 December 2013 ३० दिसम्बर २०१३

नव वर्ष आया naw warsh aayaa नव वर्ष आया

एक पावन मंत्र गूँजा

नेह का नवगीत बनकर

शंख से बोला बजो

नव वर्ष आया।

शांत कोहरे ने बनाया

आसमां में इक झरोखा।

गुनगुनी सी धूप ने

शीतल हवा का वेग रोका।

एक अंकुर प्रात फूटा

हर अँगन में प्रीत बनकर।

नींद से बोला उठो

नव वर्ष आया।

नीड़ अपना छोड़ चिड़ियाँ

पर पसारे चहचहाईं।

डाल चटकीं चारु कलियाँ

भँवरों से नज़रें मिलाईं।

एक निश्चय पुनः पनपा

हर नयन में जीत बनकर।

कर पकड़

ek paawan mantr goonjaa

·

neh kaa nawageet banakar

·

shankh se bolaa bajo

·

naw warsh aayaa

·

shaant kohare ne banaayaa

·

aasamaan men ik jharokhaa

·

gunagunee see dhoop ne

·

sheetal hawaa kaa weg rokaa

·

ek ankur praat phootaa

·

har angan men preet banakar

·

neend se bolaa utho

·

naw warsh aayaa

·

need apanaa chod chidiyaan

·

par pasaare chahachahaaeen

·

daal chatakeen chaaru kaliyaan

·

bhanvaron se nazaren milaaeen

·

ek nishchay punah panapaa

·

har nayan men jeet banakar

·

kar pakad

एक पावन मंत्र गूँजा

नेह का नवगीत बनकर

शंख से बोला बजो

नव वर्ष आया।

शांत कोहरे ने बनाया

आसमां में इक झरोखा।

गुनगुनी सी धूप ने

शीतल हवा का वेग रोका।

एक अंकुर प्रात फूटा

हर अँगन में प्रीत बनकर।

नींद से बोला उठो

नव वर्ष आया।

नीड़ अपना छोड़ चिड़ियाँ

पर पसारे चहचहाईं।

डाल चटकीं चारु कलियाँ

भँवरों से नज़रें मिलाईं।

एक निश्चय पुनः पनपा

हर नयन में जीत बनकर।

कर पकड़

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗