कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५८ / १६३ № 58 of 163 रचना ५८ / १६३
२० फ़रवरी २०१४ 20 February 2014 २० फ़रवरी २०१४

फिर बसंत आया phir basant aayaa फिर बसंत आया

रंग-रँगीले रथ पर चढ़कर।

रस-सुगंध की झोली भरकर।

फिर बसंत आया।

आज नई फिर धूप खिली है।

दिशा दिशा उजली उजली है।

कुहरे वाली बीती बातें।

नया सूर्य, नव भोर मिली है।

नई इबारत फिर गढ़ने को

परिवर्तन लाया।

डाल-डाल झूले इतराए

बाग-बाग अंबुआ बौराए।

प्रेम-प्रणय के रसित सुरों में

कोयल मुग्धा शोर मचाए।

मृदुल तान मृदु साज़ छेड़कर

कुंज-कुंज गाया।

वन

rang-rangeele rath par chढ़kar

·

ras-sugandh kee jholee bharakar

·

phir basant aayaa

·

aaj naee phir dhoop khilee hai

·

dishaa dishaa ujalee ujalee hai

·

kuhare waalee beetee baaten

·

nayaa soory, naw bhor milee hai

·

naee ibaarat phir gढ़ne ko

·

pariwartan laayaa

·

daal-daal jhoole itaraae

·

baag-baag anbuaa bauraae

·

prem-pranay ke rasit suron men

·

koyal mugdhaa shor machaae

·

mriidul taan mriidu saaz chedakar

·

kunj-kunj gaayaa

·

wan

रंग-रँगीले रथ पर चढ़कर।

रस-सुगंध की झोली भरकर।

फिर बसंत आया।

आज नई फिर धूप खिली है।

दिशा दिशा उजली उजली है।

कुहरे वाली बीती बातें।

नया सूर्य, नव भोर मिली है।

नई इबारत फिर गढ़ने को

परिवर्तन लाया।

डाल-डाल झूले इतराए

बाग-बाग अंबुआ बौराए।

प्रेम-प्रणय के रसित सुरों में

कोयल मुग्धा शोर मचाए।

मृदुल तान मृदु साज़ छेड़कर

कुंज-कुंज गाया।

वन

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗