फिर बसंत आया phir basant aayaa फिर बसंत आया
रंग-रँगीले रथ पर चढ़कर।
रस-सुगंध की झोली भरकर।
फिर बसंत आया।
आज नई फिर धूप खिली है।
दिशा दिशा उजली उजली है।
कुहरे वाली बीती बातें।
नया सूर्य, नव भोर मिली है।
नई इबारत फिर गढ़ने को
परिवर्तन लाया।
डाल-डाल झूले इतराए
बाग-बाग अंबुआ बौराए।
प्रेम-प्रणय के रसित सुरों में
कोयल मुग्धा शोर मचाए।
मृदुल तान मृदु साज़ छेड़कर
कुंज-कुंज गाया।
वन
rang-rangeele rath par chढ़kar
ras-sugandh kee jholee bharakar
phir basant aayaa
aaj naee phir dhoop khilee hai
dishaa dishaa ujalee ujalee hai
kuhare waalee beetee baaten
nayaa soory, naw bhor milee hai
naee ibaarat phir gढ़ne ko
pariwartan laayaa
daal-daal jhoole itaraae
baag-baag anbuaa bauraae
prem-pranay ke rasit suron men
koyal mugdhaa shor machaae
mriidul taan mriidu saaz chedakar
kunj-kunj gaayaa
wan
रंग-रँगीले रथ पर चढ़कर।
रस-सुगंध की झोली भरकर।
फिर बसंत आया।
आज नई फिर धूप खिली है।
दिशा दिशा उजली उजली है।
कुहरे वाली बीती बातें।
नया सूर्य, नव भोर मिली है।
नई इबारत फिर गढ़ने को
परिवर्तन लाया।
डाल-डाल झूले इतराए
बाग-बाग अंबुआ बौराए।
प्रेम-प्रणय के रसित सुरों में
कोयल मुग्धा शोर मचाए।
मृदुल तान मृदु साज़ छेड़कर
कुंज-कुंज गाया।
वन