कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५८ / १६४ № 58 of 164 रचना ५८ / १६४
२० फ़रवरी २०१४ 20 February 2014 २० फ़रवरी २०१४

फिर बसंत आया phir basant aayaa फिर बसंत आया

रंग-रँगीले रथ पर चढ़कर।

॥

रस-सुगंध की झोली भरकर।

॥

फिर बसंत आया।

॥

आज नई फिर धूप खिली है।

॥

दिशा दिशा उजली उजली है।

॥

कुहरे वाली बीती बातें।

॥

नया सूर्य, नव भोर मिली है।

॥

नई इबारत फिर गढ़ने को

॥

परिवर्तन लाया।

॥

डाल-डाल झूले इतराए

॥

बाग-बाग अंबुआ बौराए।

॥

प्रेम-प्रणय के रसित सुरों में

॥

कोयल मुग्धा शोर मचाए।

॥

मृदुल तान मृदु साज़ छेड़कर

॥

कुंज-कुंज गाया।

॥

वन

rang-rangeele rath par chढ़kar

·

ras-sugandh kee jholee bharakar

·

phir basant aayaa

·

aaj naee phir dhoop khilee hai

·

dishaa dishaa ujalee ujalee hai

·

kuhare waalee beetee baaten

·

nayaa soory, naw bhor milee hai

·

naee ibaarat phir gढ़ne ko

·

pariwartan laayaa

·

daal-daal jhoole itaraae

·

baag-baag anbuaa bauraae

·

prem-pranay ke rasit suron men

·

koyal mugdhaa shor machaae

·

mriidul taan mriidu saaz chedakar

·

kunj-kunj gaayaa

·

wan

रंग-रँगीले रथ पर चढ़कर।

॥

रस-सुगंध की झोली भरकर।

॥

फिर बसंत आया।

॥

आज नई फिर धूप खिली है।

॥

दिशा दिशा उजली उजली है।

॥

कुहरे वाली बीती बातें।

॥

नया सूर्य, नव भोर मिली है।

॥

नई इबारत फिर गढ़ने को

॥

परिवर्तन लाया।

॥

डाल-डाल झूले इतराए

॥

बाग-बाग अंबुआ बौराए।

॥

प्रेम-प्रणय के रसित सुरों में

॥

कोयल मुग्धा शोर मचाए।

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मृदुल तान मृदु साज़ छेड़कर

॥

कुंज-कुंज गाया।

॥

वन

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗