कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३३ / ६७ № 33 of 67 रचना ३३ / ६७
२५ फ़रवरी २०१४ 25 February 2014 २५ फ़रवरी २०१४

मानुष जन्म मिला तुम्हें maanush janm milaa tumhen मानुष जन्म मिला तुम्हें

मानुष जन्म

मिला तुम्हें, कर्म करो कुछ नेक।

॥

काटो अपने

मनस से, हे प्राणी, अविवेक।

॥

माया जोड़ें

क्यों भला, गर हो पूत सपूत।

॥

जोड़ी वो

किस काम की, गर हो पूत कपूत।

॥

गुरुजन का

आदर करें, मन से हो आभार।

॥

सदा शिष्य

कहलाइए, बढ़े ज्ञान भंडार।

॥

धन जोड़ा तो

व्यर्थ है, जोड़ो नेकी नाम।

॥

होता हर

शुभ काम का, भला सदा अंजाम।

॥

भला नहीं

जग का किया,

maanush janm

milaa tumhen, karm karo kuch nek

·

kaato apane

manas se, he praanee, awivek

·

maayaa joden

kyon bhalaa, gar ho poot sapoot

·

jodee wo

kis kaam kee, gar ho poot kapoot

·

gurujan kaa

aadar karen, man se ho aabhaar

·

sadaa shishy

kahalaaie, bढ़e jnaan bhandaar

·

dhan jodaa to

wyarth hai, jodo nekee naam

·

hotaa har

shubh kaam kaa, bhalaa sadaa anjaam

·

bhalaa naheen

jag kaa kiyaa,

मानुष जन्म

मिला तुम्हें, कर्म करो कुछ नेक।

॥

काटो अपने

मनस से, हे प्राणी, अविवेक।

॥

माया जोड़ें

क्यों भला, गर हो पूत सपूत।

॥

जोड़ी वो

किस काम की, गर हो पूत कपूत।

॥

गुरुजन का

आदर करें, मन से हो आभार।

॥

सदा शिष्य

कहलाइए, बढ़े ज्ञान भंडार।

॥

धन जोड़ा तो

व्यर्थ है, जोड़ो नेकी नाम।

॥

होता हर

शुभ काम का, भला सदा अंजाम।

॥

भला नहीं

जग का किया,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗