कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३१ / ६५ № 31 of 65 रचना ३१ / ६५
२५ फ़रवरी २०१४ 25 February 2014 २५ फ़रवरी २०१४

जागो भारत वासियों jaago bhaarat waasiyon जागो भारत वासियों

जागो

भारतवासियों, आज वक्त की माँग।

जो नकाब

में छिप रहे, तोड़ें उनका स्वाँग।

जन-हित को

तैयार हों, लेकर जोश जुनून।

साम दाम औ

भेद से, बने शक्त कानून।

आज एकजुट

हों सभी, सुलग रहा है देश।

हर संभव

तदवीर से, शुभता करे प्रवेश।

युग निर्माता देश के, कर प्रयत्न दिन रात,

आज़ादी की दे गए, हमें सुखद सौगात।

प्राण निछावर कर दिये, हरने जन

jaago

bhaaratawaasiyon, aaj wakt kee maang

·

jo nakaab

men chip rahe, toden unakaa svaang

·

jan-hit ko

taiyaar hon, lekar josh junoon

·

saam daam au

bhed se, bane shakt kaanoon

·

aaj ekajut

hon sabhee, sulag rahaa hai desh

·

har sanbhaw

tadaweer se, shubhataa kare prawesh

·

yug nirmaataa desh ke, kar prayatn din raat,

·

aazaadee kee de gae, hamen sukhad saugaat

·

praan nichaawar kar diye, harane jan

जागो

भारतवासियों, आज वक्त की माँग।

जो नकाब

में छिप रहे, तोड़ें उनका स्वाँग।

जन-हित को

तैयार हों, लेकर जोश जुनून।

साम दाम औ

भेद से, बने शक्त कानून।

आज एकजुट

हों सभी, सुलग रहा है देश।

हर संभव

तदवीर से, शुभता करे प्रवेश।

युग निर्माता देश के, कर प्रयत्न दिन रात,

आज़ादी की दे गए, हमें सुखद सौगात।

प्राण निछावर कर दिये, हरने जन

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗