कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २८ / ६५ № 28 of 65 रचना २८ / ६५
२१ दिसम्बर २०१३ 21 December 2013 २१ दिसम्बर २०१३

महती महिमा योग की mahatee mahimaa yog kee महती महिमा योग की

महती महिमा योग की, जिसने जानी मीत

नहीं सताएगी उसे, गर्मी हो या शीत।

जुड़ा हुआ है स्वास्थ्य

से, सुख दुख का संजोग।

मूल मंत्र यह

जानिए, योग भगाए रोग।

भोग संग यदि योग

भी, हो जीवन का अंग।

धूमिल ना होगा

कभी, यौवन का नवरंग।

दिनचर्या यदि

चुस्त हो, और स्वस्थ हो सोच।

होगी रक्त

प्रवाह से, अंग-अंग में लोच।

योग मनुष

के मेटता, मन से दुष्ट विचार।&

mahatee mahimaa yog kee, jisane jaanee meet

·

naheen sataaegee use, garmee ho yaa sheet

judaa huaa hai svaasthy

se, sukh dukh kaa sanjog

·

mool mantr yah

jaanie, yog bhagaae rog

·

bhog sang yadi yog

bhee, ho jeewan kaa ang

·

dhoomil naa hogaa

kabhee, yauwan kaa nawarang

·

dinacharyaa yadi

chust ho, aur svasth ho soch

·

hogee rakt

prawaah se, ang-ang men loch

·

yog manush

ke metataa, man se dusht wichaar&

महती महिमा योग की, जिसने जानी मीत

नहीं सताएगी उसे, गर्मी हो या शीत।

जुड़ा हुआ है स्वास्थ्य

से, सुख दुख का संजोग।

मूल मंत्र यह

जानिए, योग भगाए रोग।

भोग संग यदि योग

भी, हो जीवन का अंग।

धूमिल ना होगा

कभी, यौवन का नवरंग।

दिनचर्या यदि

चुस्त हो, और स्वस्थ हो सोच।

होगी रक्त

प्रवाह से, अंग-अंग में लोच।

योग मनुष

के मेटता, मन से दुष्ट विचार।&

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗