कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २९ / ६७ № 29 of 67 रचना २९ / ६७
२१ दिसम्बर २०१३ 21 December 2013 २१ दिसम्बर २०१३

महती महिमा योग की mahatee mahimaa yog kee महती महिमा योग की

महती महिमा योग की, जिसने जानी मीत

॥

नहीं सताएगी उसे, गर्मी हो या शीत।

जुड़ा हुआ है स्वास्थ्य

से, सुख दुख का संजोग।

॥

मूल मंत्र यह

जानिए, योग भगाए रोग।

॥

भोग संग यदि योग

भी, हो जीवन का अंग।

॥

धूमिल ना होगा

कभी, यौवन का नवरंग।

॥

दिनचर्या यदि

चुस्त हो, और स्वस्थ हो सोच।

॥

होगी रक्त

प्रवाह से, अंग-अंग में लोच।

॥

योग मनुष

के मेटता, मन से दुष्ट विचार।&

mahatee mahimaa yog kee, jisane jaanee meet

·

naheen sataaegee use, garmee ho yaa sheet

judaa huaa hai svaasthy

se, sukh dukh kaa sanjog

·

mool mantr yah

jaanie, yog bhagaae rog

·

bhog sang yadi yog

bhee, ho jeewan kaa ang

·

dhoomil naa hogaa

kabhee, yauwan kaa nawarang

·

dinacharyaa yadi

chust ho, aur svasth ho soch

·

hogee rakt

prawaah se, ang-ang men loch

·

yog manush

ke metataa, man se dusht wichaar&

महती महिमा योग की, जिसने जानी मीत

॥

नहीं सताएगी उसे, गर्मी हो या शीत।

जुड़ा हुआ है स्वास्थ्य

से, सुख दुख का संजोग।

॥

मूल मंत्र यह

जानिए, योग भगाए रोग।

॥

भोग संग यदि योग

भी, हो जीवन का अंग।

॥

धूमिल ना होगा

कभी, यौवन का नवरंग।

॥

दिनचर्या यदि

चुस्त हो, और स्वस्थ हो सोच।

॥

होगी रक्त

प्रवाह से, अंग-अंग में लोच।

॥

योग मनुष

के मेटता, मन से दुष्ट विचार।&

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗