कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४७ / १६३ № 47 of 163 रचना ४७ / १६३
१६ दिसम्बर २०१३ 16 December 2013 १६ दिसम्बर २०१३

क्यों चले आए शहर kyon chale aae shahar क्यों चले आए शहर

क्यों चले आए शहर,

बोलो

श्रमिक क्यों गाँव छोड़ा।

पालने की नेह डोरी

को भुलाकर आ गए।

रेशमी ऋतुओं की लोरी

को रुलाकर आ गए।

छान-छप्पर छोड़ आए

गेह का दिल तोड़ आए

सोच लो क्या पा लिया है

और क्या सामान जोड़ा?

छोड़कर पगडंडियाँ

पाषाण पथ अपना लिया।

गंध माटी भूलकर

साँसों भरी दूषित हवा।

प्रीत सपनों से लगाकर

पीठ

kyon chale aae shahar,

bolo

·

shramik kyon gaanv chodaa

·

paalane kee neh doree

·

ko bhulaakar aa gae

·

reshamee riituon kee loree

·

ko rulaakar aa gae

·

chaan-chappar chod aae

·

geh kaa dil tod aae

·

soch lo kyaa paa liyaa hai

·

aur kyaa saamaan jodaa?

·

chodakar pagadandiyaan

·

paashaan path apanaa liyaa

·

gandh maatee bhoolakar

·

saanson bharee dooshit hawaa

·

preet sapanon se lagaakar

·

peeth

क्यों चले आए शहर,

बोलो

श्रमिक क्यों गाँव छोड़ा।

पालने की नेह डोरी

को भुलाकर आ गए।

रेशमी ऋतुओं की लोरी

को रुलाकर आ गए।

छान-छप्पर छोड़ आए

गेह का दिल तोड़ आए

सोच लो क्या पा लिया है

और क्या सामान जोड़ा?

छोड़कर पगडंडियाँ

पाषाण पथ अपना लिया।

गंध माटी भूलकर

साँसों भरी दूषित हवा।

प्रीत सपनों से लगाकर

पीठ

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗