कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १० / १६३ № 10 of 163 रचना १० / १६३
१ जनवरी २०१३ 1 January 2013 १ जनवरी २०१३

नवल वर्ष तव अभिनंदन nawal warsh taw abhinandan नवल वर्ष तव अभिनंदन

एक साल के प्रियम पाहुने

नवल वर्ष तव अभिनंदन।

इंद्र्धनुष के सतरंगों से

कुदरत ने श्रंगार किए।

हर उपवन में फूल नए हैं

हर डाली पर पात नए।

अंतरमन महकाकर कर दो

जीवन को चन्दन-चन्दन।

दुर्भावों की चिता सजे औ

सद्भावों की ज्योत बढ़े।

प्रेम त्याग के तटबंधों में

जीवन धारा फिर पहुँचे।

निर्झर से हम हों प्रवाहमय

काटो हर बाधित बंधन।

भ्रष्ट राज के बनें विरोधी

सबल सुशासन लाएँ

ek saal ke priyam paahune

·

nawal warsh taw abhinandan

·

indrdhanush ke satarangon se

·

kudarat ne shrangaar kie

·

har upawan men phool nae hain

·

har daalee par paat nae

·

antaraman mahakaakar kar do

·

jeewan ko chandan-chandan

·

durbhaawon kee chitaa saje au

·

sadbhaawon kee jyot bढ़e

·

prem tyaag ke tatabandhon men

·

jeewan dhaaraa phir pahunche

·

nirjhar se ham hon prawaahamay

·

kaato har baadhit bandhan

·

bhrasht raaj ke banen wirodhee

·

sabal sushaasan laaen

एक साल के प्रियम पाहुने

नवल वर्ष तव अभिनंदन।

इंद्र्धनुष के सतरंगों से

कुदरत ने श्रंगार किए।

हर उपवन में फूल नए हैं

हर डाली पर पात नए।

अंतरमन महकाकर कर दो

जीवन को चन्दन-चन्दन।

दुर्भावों की चिता सजे औ

सद्भावों की ज्योत बढ़े।

प्रेम त्याग के तटबंधों में

जीवन धारा फिर पहुँचे।

निर्झर से हम हों प्रवाहमय

काटो हर बाधित बंधन।

भ्रष्ट राज के बनें विरोधी

सबल सुशासन लाएँ

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗