नवल वर्ष तव अभिनंदन nawal warsh taw abhinandan नवल वर्ष तव अभिनंदन
एक साल के प्रियम पाहुने
नवल वर्ष तव अभिनंदन।
इंद्र्धनुष के सतरंगों से
कुदरत ने श्रंगार किए।
हर उपवन में फूल नए हैं
हर डाली पर पात नए।
अंतरमन महकाकर कर दो
जीवन को चन्दन-चन्दन।
दुर्भावों की चिता सजे औ
सद्भावों की ज्योत बढ़े।
प्रेम त्याग के तटबंधों में
जीवन धारा फिर पहुँचे।
निर्झर से हम हों प्रवाहमय
काटो हर बाधित बंधन।
भ्रष्ट राज के बनें विरोधी
सबल सुशासन लाएँ
ek saal ke priyam paahune
nawal warsh taw abhinandan
indrdhanush ke satarangon se
kudarat ne shrangaar kie
har upawan men phool nae hain
har daalee par paat nae
antaraman mahakaakar kar do
jeewan ko chandan-chandan
durbhaawon kee chitaa saje au
sadbhaawon kee jyot bढ़e
prem tyaag ke tatabandhon men
jeewan dhaaraa phir pahunche
nirjhar se ham hon prawaahamay
kaato har baadhit bandhan
bhrasht raaj ke banen wirodhee
sabal sushaasan laaen
एक साल के प्रियम पाहुने
नवल वर्ष तव अभिनंदन।
इंद्र्धनुष के सतरंगों से
कुदरत ने श्रंगार किए।
हर उपवन में फूल नए हैं
हर डाली पर पात नए।
अंतरमन महकाकर कर दो
जीवन को चन्दन-चन्दन।
दुर्भावों की चिता सजे औ
सद्भावों की ज्योत बढ़े।
प्रेम त्याग के तटबंधों में
जीवन धारा फिर पहुँचे।
निर्झर से हम हों प्रवाहमय
काटो हर बाधित बंधन।
भ्रष्ट राज के बनें विरोधी
सबल सुशासन लाएँ