कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १० / १६४ № 10 of 164 रचना १० / १६४
१ जनवरी २०१३ 1 January 2013 १ जनवरी २०१३

नवल वर्ष तव अभिनंदन nawal warsh taw abhinandan नवल वर्ष तव अभिनंदन

एक साल के प्रियम पाहुने

॥

नवल वर्ष तव अभिनंदन।

॥

इंद्र्धनुष के सतरंगों से

॥

कुदरत ने श्रंगार किए।

॥

हर उपवन में फूल नए हैं

॥

हर डाली पर पात नए।

॥

अंतरमन महकाकर कर दो

॥

जीवन को चन्दन-चन्दन।

॥

दुर्भावों की चिता सजे औ

॥

सद्भावों की ज्योत बढ़े।

॥

प्रेम त्याग के तटबंधों में

॥

जीवन धारा फिर पहुँचे।

॥

निर्झर से हम हों प्रवाहमय

॥

काटो हर बाधित बंधन।

॥

भ्रष्ट राज के बनें विरोधी

॥

सबल सुशासन लाएँ

ek saal ke priyam paahune

·

nawal warsh taw abhinandan

·

indrdhanush ke satarangon se

·

kudarat ne shrangaar kie

·

har upawan men phool nae hain

·

har daalee par paat nae

·

antaraman mahakaakar kar do

·

jeewan ko chandan-chandan

·

durbhaawon kee chitaa saje au

·

sadbhaawon kee jyot bढ़e

·

prem tyaag ke tatabandhon men

·

jeewan dhaaraa phir pahunche

·

nirjhar se ham hon prawaahamay

·

kaato har baadhit bandhan

·

bhrasht raaj ke banen wirodhee

·

sabal sushaasan laaen

एक साल के प्रियम पाहुने

॥

नवल वर्ष तव अभिनंदन।

॥

इंद्र्धनुष के सतरंगों से

॥

कुदरत ने श्रंगार किए।

॥

हर उपवन में फूल नए हैं

॥

हर डाली पर पात नए।

॥

अंतरमन महकाकर कर दो

॥

जीवन को चन्दन-चन्दन।

॥

दुर्भावों की चिता सजे औ

॥

सद्भावों की ज्योत बढ़े।

॥

प्रेम त्याग के तटबंधों में

॥

जीवन धारा फिर पहुँचे।

॥

निर्झर से हम हों प्रवाहमय

॥

काटो हर बाधित बंधन।

॥

भ्रष्ट राज के बनें विरोधी

॥

सबल सुशासन लाएँ

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗