कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९ / १६३ № 9 of 163 रचना ९ / १६३
३१ दिसम्बर २०१२ 31 December 2012 ३१ दिसम्बर २०१२

श्री गणेश हो शुभ कर्मों का shree ganesh ho shubh karmon kaa श्री गणेश हो शुभ कर्मों का

श्री गणेश हो शुभ कर्मों का

नए वर्ष का हुआ प्रवेश।

काल चक्र कब कहाँ रुका है

गतिमय दिन औ रात।

भूल पुराना बढ़ते जाएँ

नए वक्त के साथ।

बातें सारी खो जाती हैं

रह जाती हैं यादें शेष।

कटुताओं के पृष्ठ फाड़कर

फिर से लिखें किताब।

शब्द शब्द में नवजीवन हो

मानवता की आब।

सत्कर्मों की जुड़े श्रंखला

बन जाए यह साल विशेष।

दृढ़ताओं के बल से तोड़ें

दकियानूस रिवाज

क्षमताओं से नवनिर्मित

shree ganesh ho shubh karmon kaa

·

nae warsh kaa huaa prawesh

·

kaal chakr kab kahaan rukaa hai

·

gatimay din au raat

·

bhool puraanaa bढ़te jaaen

·

nae wakt ke saath

·

baaten saaree kho jaatee hain

·

rah jaatee hain yaaden shesh

·

katutaaon ke priishth phaadakar

·

phir se likhen kitaab

·

shabd shabd men nawajeewan ho

·

maanawataa kee aab

·

satkarmon kee jude shrankhalaa

·

ban jaae yah saal wishesh

·

driiढ़taaon ke bal se toden

·

dakiyaanoos riwaaj

·

kshamataaon se nawanirmit

श्री गणेश हो शुभ कर्मों का

नए वर्ष का हुआ प्रवेश।

काल चक्र कब कहाँ रुका है

गतिमय दिन औ रात।

भूल पुराना बढ़ते जाएँ

नए वक्त के साथ।

बातें सारी खो जाती हैं

रह जाती हैं यादें शेष।

कटुताओं के पृष्ठ फाड़कर

फिर से लिखें किताब।

शब्द शब्द में नवजीवन हो

मानवता की आब।

सत्कर्मों की जुड़े श्रंखला

बन जाए यह साल विशेष।

दृढ़ताओं के बल से तोड़ें

दकियानूस रिवाज

क्षमताओं से नवनिर्मित

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗