श्री गणेश हो शुभ कर्मों का shree ganesh ho shubh karmon kaa श्री गणेश हो शुभ कर्मों का
श्री गणेश हो शुभ कर्मों का
नए वर्ष का हुआ प्रवेश।
काल चक्र कब कहाँ रुका है
गतिमय दिन औ रात।
भूल पुराना बढ़ते जाएँ
नए वक्त के साथ।
बातें सारी खो जाती हैं
रह जाती हैं यादें शेष।
कटुताओं के पृष्ठ फाड़कर
फिर से लिखें किताब।
शब्द शब्द में नवजीवन हो
मानवता की आब।
सत्कर्मों की जुड़े श्रंखला
बन जाए यह साल विशेष।
दृढ़ताओं के बल से तोड़ें
दकियानूस रिवाज
क्षमताओं से नवनिर्मित
shree ganesh ho shubh karmon kaa
nae warsh kaa huaa prawesh
kaal chakr kab kahaan rukaa hai
gatimay din au raat
bhool puraanaa bढ़te jaaen
nae wakt ke saath
baaten saaree kho jaatee hain
rah jaatee hain yaaden shesh
katutaaon ke priishth phaadakar
phir se likhen kitaab
shabd shabd men nawajeewan ho
maanawataa kee aab
satkarmon kee jude shrankhalaa
ban jaae yah saal wishesh
driiढ़taaon ke bal se toden
dakiyaanoos riwaaj
kshamataaon se nawanirmit
श्री गणेश हो शुभ कर्मों का
नए वर्ष का हुआ प्रवेश।
काल चक्र कब कहाँ रुका है
गतिमय दिन औ रात।
भूल पुराना बढ़ते जाएँ
नए वक्त के साथ।
बातें सारी खो जाती हैं
रह जाती हैं यादें शेष।
कटुताओं के पृष्ठ फाड़कर
फिर से लिखें किताब।
शब्द शब्द में नवजीवन हो
मानवता की आब।
सत्कर्मों की जुड़े श्रंखला
बन जाए यह साल विशेष।
दृढ़ताओं के बल से तोड़ें
दकियानूस रिवाज
क्षमताओं से नवनिर्मित