कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १४ / ६५ № 14 of 65 रचना १४ / ६५
३ नवम्बर २०१२ 3 November 2012 ३ नवम्बर २०१२

माँ लक्ष्मी दे दो हमें maan lakshmee de do hamen माँ लक्ष्मी दे दो हमें

माँ लक्ष्मी दे दो हमें, ऐसा तुम वरदान।

तिमिर विश्व का दूर कर, फैलाएँ

सदज्ञान।

युग युग से जलते रहे, दीप हमारे

द्वार।

माँ तुम आकर मेट दो, अंतरतम इस

बार।

राह दिखाओ माँ हमें, बढ़ें कदम जिस छोर

दीपक प्रेम-प्रकाश के, जगमग हों उस ओर।

चाह नहीं धन की हमें, नहीं चाहते ताज।

रावण राज्य विनष्ट हो, चाहें पुनः

maan lakshmee de do hamen, aisaa tum waradaan

·

timir wishv kaa door kar, phailaaen

sadajnaan

·

yug yug se jalate rahe, deep hamaare

dvaar

·

maan tum aakar met do, antaratam is

baar

·

raah dikhaao maan hamen, bढ़en kadam jis chor

deepak prem-prakaash ke, jagamag hon us or

·

chaah naheen dhan kee hamen, naheen chaahate taaj

raawan raajy winasht ho, chaahen punah

माँ लक्ष्मी दे दो हमें, ऐसा तुम वरदान।

तिमिर विश्व का दूर कर, फैलाएँ

सदज्ञान।

युग युग से जलते रहे, दीप हमारे

द्वार।

माँ तुम आकर मेट दो, अंतरतम इस

बार।

राह दिखाओ माँ हमें, बढ़ें कदम जिस छोर

दीपक प्रेम-प्रकाश के, जगमग हों उस ओर।

चाह नहीं धन की हमें, नहीं चाहते ताज।

रावण राज्य विनष्ट हो, चाहें पुनः

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗