काश दिखलाए राह साल नया kaash dikhalaae raah saal nayaa काश दिखलाए राह साल नया
इस कदर ख्वाब वे सजा बैठे।
देश को दाँव पर लगा बैठे।
मानकर मिल्कियत महज अपनी
तख्त औ ताज को लजा बैठे।
मानवी मूल्य सब चढ़े सूली
फर्ज़ को कब्र में दबा बैठे।
दीप रौशन किए फ़कत अपने
आशियाँ औरों का जला बैठे।
आब आँखों की लुट चुकी उनकी
आबरू स्वत्व की लुटा बैठे।
डूबते खुद अगर मुनासिब था
बेरहम दुखियों को डुबा बैठे।
काश! दिखलाए राह साल नया
जो गए व्यर्थ ही गँवा बैठे।
-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
is kadar khvaab we sajaa baithe
desh ko daanv par lagaa baithe
maanakar milkiyat mahaj apanee
takht au taaj ko lajaa baithe
maanawee mooly sab chढ़e soolee
pharz ko kabr men dabaa baithe
deep raushan kie fakat apane
aashiyaan auron kaa jalaa baithe
aab aankhon kee lut chukee unakee
aabaroo svatv kee lutaa baithe
doobate khud agar munaasib thaa
beraham dukhiyon ko dubaa baithe
kaash! dikhalaae raah saal nayaa
jo gae wyarth hee ganvaa baithe
-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
इस कदर ख्वाब वे सजा बैठे।
देश को दाँव पर लगा बैठे।
मानकर मिल्कियत महज अपनी
तख्त औ ताज को लजा बैठे।
मानवी मूल्य सब चढ़े सूली
फर्ज़ को कब्र में दबा बैठे।
दीप रौशन किए फ़कत अपने
आशियाँ औरों का जला बैठे।
आब आँखों की लुट चुकी उनकी
आबरू स्वत्व की लुटा बैठे।
डूबते खुद अगर मुनासिब था
बेरहम दुखियों को डुबा बैठे।
काश! दिखलाए राह साल नया
जो गए व्यर्थ ही गँवा बैठे।
-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी