कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२७ / १६३ № 127 of 163 रचना १२७ / १६३
१६ जनवरी २०१७ 16 January 2017 १६ जनवरी २०१७

भरे पुण्य मेले bhare puny mele भरे पुण्य मेले

बदल सूर्य ने निज रथ-पथ

शुभ पाँव धरे धनु छोड़ मकर में।

भरे पुण्य-मेले, नदियों-तट

शंख फूँक, हर गाँव-शहर में।

मौसम ने करवट फिर बदली

सर्द हवा ने पाँव समेटे

जाग पड़े, भँवरे, कलियाँ, गुल

जो सोए थे शीत लपेटे

मन पाखी उड़ चला पतंगों-

संग डोर पर नीलांबर में।

बढ़े दिवस, घर लौटे पाखी

मिली पुनः चह-चह नीड़ों को

कुदरत बाँट रही अंजुरि-भर

badal soory ne nij rath-path

shubh paanv dhare dhanu chod makar men

bhare puny-mele, nadiyon-tat

shankh phoonk, har gaanv-shahar men

·

mausam ne karawat phir badalee

sard hawaa ne paanv samete

jaag pade, bhanvare, kaliyaan, gul

jo soe the sheet lapete

·

man paakhee ud chalaa patangon-

sang dor par neelaanbar men

·

bढ़e diwas, ghar laute paakhee

milee punah chah-chah needon ko

kudarat baant rahee anjuri-bhar

बदल सूर्य ने निज रथ-पथ

शुभ पाँव धरे धनु छोड़ मकर में।

भरे पुण्य-मेले, नदियों-तट

शंख फूँक, हर गाँव-शहर में।

मौसम ने करवट फिर बदली

सर्द हवा ने पाँव समेटे

जाग पड़े, भँवरे, कलियाँ, गुल

जो सोए थे शीत लपेटे

मन पाखी उड़ चला पतंगों-

संग डोर पर नीलांबर में।

बढ़े दिवस, घर लौटे पाखी

मिली पुनः चह-चह नीड़ों को

कुदरत बाँट रही अंजुरि-भर

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗