भरे पुण्य मेले bhare puny mele भरे पुण्य मेले
बदल सूर्य ने निज रथ-पथ
शुभ पाँव धरे धनु छोड़ मकर में।
भरे पुण्य-मेले, नदियों-तट
शंख फूँक, हर गाँव-शहर में।
मौसम ने करवट फिर बदली
सर्द हवा ने पाँव समेटे
जाग पड़े, भँवरे, कलियाँ, गुल
जो सोए थे शीत लपेटे
मन पाखी उड़ चला पतंगों-
संग डोर पर नीलांबर में।
बढ़े दिवस, घर लौटे पाखी
मिली पुनः चह-चह नीड़ों को
कुदरत बाँट रही अंजुरि-भर
badal soory ne nij rath-path
shubh paanv dhare dhanu chod makar men
bhare puny-mele, nadiyon-tat
shankh phoonk, har gaanv-shahar men
mausam ne karawat phir badalee
sard hawaa ne paanv samete
jaag pade, bhanvare, kaliyaan, gul
jo soe the sheet lapete
man paakhee ud chalaa patangon-
sang dor par neelaanbar men
bढ़e diwas, ghar laute paakhee
milee punah chah-chah needon ko
kudarat baant rahee anjuri-bhar
बदल सूर्य ने निज रथ-पथ
शुभ पाँव धरे धनु छोड़ मकर में।
भरे पुण्य-मेले, नदियों-तट
शंख फूँक, हर गाँव-शहर में।
मौसम ने करवट फिर बदली
सर्द हवा ने पाँव समेटे
जाग पड़े, भँवरे, कलियाँ, गुल
जो सोए थे शीत लपेटे
मन पाखी उड़ चला पतंगों-
संग डोर पर नीलांबर में।
बढ़े दिवस, घर लौटे पाखी
मिली पुनः चह-चह नीड़ों को
कुदरत बाँट रही अंजुरि-भर