कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ३३ / ११४ № 33 of 114 रचना ३३ / ११४
२१ जनवरी २०१७ 21 January 2017 २१ जनवरी २०१७

नसीब अपना अपना naseeb apanaa apanaa नसीब अपना अपना

वृद्धाश्रम में शाम के समय तीन बुजुर्ग महिलाओं में

चर्चा चल रही थी

पहली- आप यहाँ कब से हैं बहन,

अकेली हैं?

दूसरी- हम यहाँ नए हैं,

कल ही आए हैं, पति भी साथ हैं,

और आप?

पहली- हम भी तो कल ही आए हैं,

वे उधर हैं अपने साथियों में...उसने पुरुष बुजुर्गों की तरफ इशारा किया। आपका

परिवार कहाँ है,

आपके यहाँ आने का क्या कारण है?

दूसरी- मेरे दो बेटे हैं,

पर दोनों विदेश में सेवा कार्य कर रहे हैं

wriiddhaashram men shaam ke samay teen bujurg mahilaaon men

charchaa chal rahee thee

·

pahalee- aap yahaan kab se hain bahan,

akelee hain?

·

doosaree- ham yahaan nae hain,

kal hee aae hain, pati bhee saath hain,

aur aap?

·

pahalee- ham bhee to kal hee aae hain,

we udhar hain apane saathiyon menusane purush bujurgon kee taraph ishaaraa kiyaa aapakaa

pariwaar kahaan hai,

aapake yahaan aane kaa kyaa kaaran hai?

·

doosaree- mere do bete hain,

par donon widesh men sewaa kaary kar rahe hain

वृद्धाश्रम में शाम के समय तीन बुजुर्ग महिलाओं में

चर्चा चल रही थी

पहली- आप यहाँ कब से हैं बहन,

अकेली हैं?

दूसरी- हम यहाँ नए हैं,

कल ही आए हैं, पति भी साथ हैं,

और आप?

पहली- हम भी तो कल ही आए हैं,

वे उधर हैं अपने साथियों में...उसने पुरुष बुजुर्गों की तरफ इशारा किया। आपका

परिवार कहाँ है,

आपके यहाँ आने का क्या कारण है?

दूसरी- मेरे दो बेटे हैं,

पर दोनों विदेश में सेवा कार्य कर रहे हैं

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗