समाधान samaadhaan समाधान
बेटा अगर समझदार हो तो परिवार टूटने या माँ-पिता को अपमानित महसूस होने का सवाल ही नहीं उठता. इसी भाव को चित्रित करती हुई लघुकथा-
“पूरे तीन साल बाद हम भारत,
अपने घर जा रहे हैं, न जाने माँ-पिता कैसे होंगे”।
उत्साह से भरपूर देवांश ने जाने की तैयारियों में लगी दक्षा को संबोधित करते हुए
कहा। अमेरिका में जॉब लगने के बाद उनको लगभग १० वर्ष हो चुके थे। इस बीच वे दो
बच्चों के माँ-पिता भी बन गए। सात
betaa agar samajhadaar ho to pariwaar tootane yaa maan-pitaa ko apamaanit mahasoos hone kaa sawaal hee naheen uthataa isee bhaaw ko chitrit karatee huee laghukathaa-
“poore teen saal baad ham bhaarat,
apane ghar jaa rahe hain, n jaane maan-pitaa kaise honge”
utsaah se bharapoor dewaansh ne jaane kee taiyaariyon men lagee dakshaa ko sanbodhit karate hue
kahaa amerikaa men jॉb lagane ke baad unako lagabhag 10 warsh ho chuke the is beech we do
bachchon ke maan-pitaa bhee ban gae saat
बेटा अगर समझदार हो तो परिवार टूटने या माँ-पिता को अपमानित महसूस होने का सवाल ही नहीं उठता. इसी भाव को चित्रित करती हुई लघुकथा-
“पूरे तीन साल बाद हम भारत,
अपने घर जा रहे हैं, न जाने माँ-पिता कैसे होंगे”।
उत्साह से भरपूर देवांश ने जाने की तैयारियों में लगी दक्षा को संबोधित करते हुए
कहा। अमेरिका में जॉब लगने के बाद उनको लगभग १० वर्ष हो चुके थे। इस बीच वे दो
बच्चों के माँ-पिता भी बन गए। सात