कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ३५ / ११४ № 35 of 114 रचना ३५ / ११४
३० जनवरी २०१७ 30 January 2017 ३० जनवरी २०१७

पीली साड़ी peelee saadee पीली साड़ी

“क्या सोच रही हो वाणी अम्मा! अब तुम्हारा सुपुत्र

नहीं आने वाला, यह चौथा बसंत है और उसने तुम्हारी सुध नहीं ली, क्या अब भी आस बाकी

है”?

-क्यों नहीं, तुम शायद भूल गई हो, पिता की मृत्यु

के बाद उनका विधि-पूर्वक क्रियाकर्म उसीने आकर करवाया था और मुझे अकेली देखकर पूरी

सुखसुविधा वाले इस आश्रम में भर्ती करके घर

बेचकर सारा पैसा मेरे नाम जमा करके गया फिर हर बसंत पंचमी पर मिलने भी आता रहा।

“kyaa soch rahee ho waanee ammaa! ab tumhaaraa suputr

naheen aane waalaa, yah chauthaa basant hai aur usane tumhaaree sudh naheen lee, kyaa ab bhee aas baakee

hai”?

·

-kyon naheen, tum shaayad bhool gaee ho, pitaa kee mriityu

ke baad unakaa widhi-poorvak kriyaakarm useene aakar karawaayaa thaa aur mujhe akelee dekhakar pooree

sukhasuwidhaa waale is aashram men bhartee karake ghar

bechakar saaraa paisaa mere naam jamaa karake gayaa phir har basant panchamee par milane bhee aataa rahaa

“क्या सोच रही हो वाणी अम्मा! अब तुम्हारा सुपुत्र

नहीं आने वाला, यह चौथा बसंत है और उसने तुम्हारी सुध नहीं ली, क्या अब भी आस बाकी

है”?

-क्यों नहीं, तुम शायद भूल गई हो, पिता की मृत्यु

के बाद उनका विधि-पूर्वक क्रियाकर्म उसीने आकर करवाया था और मुझे अकेली देखकर पूरी

सुखसुविधा वाले इस आश्रम में भर्ती करके घर

बेचकर सारा पैसा मेरे नाम जमा करके गया फिर हर बसंत पंचमी पर मिलने भी आता रहा।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗