पीली साड़ी peelee saadee पीली साड़ी
“क्या सोच रही हो वाणी अम्मा! अब तुम्हारा सुपुत्र
नहीं आने वाला, यह चौथा बसंत है और उसने तुम्हारी सुध नहीं ली, क्या अब भी आस बाकी
है”?
-क्यों नहीं, तुम शायद भूल गई हो, पिता की मृत्यु
के बाद उनका विधि-पूर्वक क्रियाकर्म उसीने आकर करवाया था और मुझे अकेली देखकर पूरी
सुखसुविधा वाले इस आश्रम में भर्ती करके घर
बेचकर सारा पैसा मेरे नाम जमा करके गया फिर हर बसंत पंचमी पर मिलने भी आता रहा।
“kyaa soch rahee ho waanee ammaa! ab tumhaaraa suputr
naheen aane waalaa, yah chauthaa basant hai aur usane tumhaaree sudh naheen lee, kyaa ab bhee aas baakee
hai”?
-kyon naheen, tum shaayad bhool gaee ho, pitaa kee mriityu
ke baad unakaa widhi-poorvak kriyaakarm useene aakar karawaayaa thaa aur mujhe akelee dekhakar pooree
sukhasuwidhaa waale is aashram men bhartee karake ghar
bechakar saaraa paisaa mere naam jamaa karake gayaa phir har basant panchamee par milane bhee aataa rahaa
“क्या सोच रही हो वाणी अम्मा! अब तुम्हारा सुपुत्र
नहीं आने वाला, यह चौथा बसंत है और उसने तुम्हारी सुध नहीं ली, क्या अब भी आस बाकी
है”?
-क्यों नहीं, तुम शायद भूल गई हो, पिता की मृत्यु
के बाद उनका विधि-पूर्वक क्रियाकर्म उसीने आकर करवाया था और मुझे अकेली देखकर पूरी
सुखसुविधा वाले इस आश्रम में भर्ती करके घर
बेचकर सारा पैसा मेरे नाम जमा करके गया फिर हर बसंत पंचमी पर मिलने भी आता रहा।