कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १३० / १६३ № 130 of 163 रचना १३० / १६३
३० मार्च २०१८ 30 March 2018 ३० मार्च २०१८

संध्या रानी जल्दी आओ sandhyaa raanee jaldee aao संध्या रानी जल्दी आओ

दिनकर दीदे फाड़ तक रहा

संध्या रानी जल्दी आओ

मैं चरवाहा भटका दिन-भर

लेकिन छाँव न पाई पिन भर

आफताब यह बड़ा

संगदिल

दूर नहीं हटता है छिन-भर

हे देवी! है विनती तुमसे

निज छतरी में हमें छिपाओ

चाट गया जल, जलता तापक

घास चर गईं किरणें

घातक

जान हथेली लिए फिरेंगे

भूखे-प्यासे ढोर कहाँ तक?

कान बंद मत करो सुकन्या!

मानो बात रहम दिखलाओ

दहक रहे हैं दिन भट्टी

बन&

dinakar deede phaad tak rahaa

·

sandhyaa raanee jaldee aao

·

main charawaahaa bhatakaa din-bhar

·

lekin chaanv n paaee pin bhar

·

aaphataab yah badaa

sangadil

·

door naheen hatataa hai chin-bhar

·

he dewee! hai winatee tumase

·

nij chataree men hamen chipaao

·

chaat gayaa jal, jalataa taapak

·

ghaas char gaeen kiranen

ghaatak

·

jaan hathelee lie phirenge

·

bhookhe-pyaase dhor kahaan tak?

·

kaan band mat karo sukanyaa!

·

maano baat raham dikhalaao

·

dahak rahe hain din bhattee

ban&

दिनकर दीदे फाड़ तक रहा

संध्या रानी जल्दी आओ

मैं चरवाहा भटका दिन-भर

लेकिन छाँव न पाई पिन भर

आफताब यह बड़ा

संगदिल

दूर नहीं हटता है छिन-भर

हे देवी! है विनती तुमसे

निज छतरी में हमें छिपाओ

चाट गया जल, जलता तापक

घास चर गईं किरणें

घातक

जान हथेली लिए फिरेंगे

भूखे-प्यासे ढोर कहाँ तक?

कान बंद मत करो सुकन्या!

मानो बात रहम दिखलाओ

दहक रहे हैं दिन भट्टी

बन&

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗