कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १३१ / १६४ № 131 of 164 रचना १३१ / १६४
३० मार्च २०१८ 30 March 2018 ३० मार्च २०१८

संध्या रानी जल्दी आओ sandhyaa raanee jaldee aao संध्या रानी जल्दी आओ

दिनकर दीदे फाड़ तक रहा

॥

संध्या रानी जल्दी आओ

॥

मैं चरवाहा भटका दिन-भर

॥

लेकिन छाँव न पाई पिन भर

॥

आफताब यह बड़ा

संगदिल

॥

दूर नहीं हटता है छिन-भर

॥

हे देवी! है विनती तुमसे

॥

निज छतरी में हमें छिपाओ

॥

चाट गया जल, जलता तापक

॥

घास चर गईं किरणें

घातक

॥

जान हथेली लिए फिरेंगे

॥

भूखे-प्यासे ढोर कहाँ तक?

॥

कान बंद मत करो सुकन्या!

॥

मानो बात रहम दिखलाओ

॥

दहक रहे हैं दिन भट्टी

बन&

dinakar deede phaad tak rahaa

·

sandhyaa raanee jaldee aao

·

main charawaahaa bhatakaa din-bhar

·

lekin chaanv n paaee pin bhar

·

aaphataab yah badaa

sangadil

·

door naheen hatataa hai chin-bhar

·

he dewee! hai winatee tumase

·

nij chataree men hamen chipaao

·

chaat gayaa jal, jalataa taapak

·

ghaas char gaeen kiranen

ghaatak

·

jaan hathelee lie phirenge

·

bhookhe-pyaase dhor kahaan tak?

·

kaan band mat karo sukanyaa!

·

maano baat raham dikhalaao

·

dahak rahe hain din bhattee

ban&

दिनकर दीदे फाड़ तक रहा

॥

संध्या रानी जल्दी आओ

॥

मैं चरवाहा भटका दिन-भर

॥

लेकिन छाँव न पाई पिन भर

॥

आफताब यह बड़ा

संगदिल

॥

दूर नहीं हटता है छिन-भर

॥

हे देवी! है विनती तुमसे

॥

निज छतरी में हमें छिपाओ

॥

चाट गया जल, जलता तापक

॥

घास चर गईं किरणें

घातक

॥

जान हथेली लिए फिरेंगे

॥

भूखे-प्यासे ढोर कहाँ तक?

॥

कान बंद मत करो सुकन्या!

॥

मानो बात रहम दिखलाओ

॥

दहक रहे हैं दिन भट्टी

बन&

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗