सखि नीम तले वर्णिक छंद में रचित गीत sakhi neem tale warnik chand men rachit geet सखि नीम तले वर्णिक छंद में रचित गीत
सखि चैत्र गया अब ताप बढ़ा।
धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।
ऋतु के सब रंग हुए गहरे।
जल स्रोत घटे जन जीव डरे।
फिर भी मन में इक आस पले।
सखि पाँव धरें चल नीम तले।
इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।
पर मीत यही अपवाद खड़ा।
खिलता रहता फल फूल भरा।
लगता मन मोहक श्वेत हरा।
भर दोपहरी नित छाँव मिले।
सखि झूल झुलें चल नीम तले।
यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।
यह पूजित है वरदायक है।
अति पावन प्राणहवा इसकी।
मन भावन शीतलता इसकी।
इक दीप धरें हर शाम ढले।
सखि गीत गुनें चल नीम तले।
यह जान बड़े गुण हैं इसके।
नित सेवन पात करें इसके।
यह खूब पुरातन औषध है।
कड़वा रस शोणित-शोधक है।
हर गाँव शहर यह खूब फले।
हर रोग मिटे सखि नीम तले।
sakhi chaitr gayaa ab taap bढ़aa
dharatee chatakee sir soory chढ़aa
riitu ke sab rang hue gahare
jal srot ghate jan jeew dare
phir bhee man men ik aas pale
sakhi paanv dharen chal neem tale
is mausam men har ped jhadaa
par meet yahee apawaad khadaa
khilataa rahataa phal phool bharaa
lagataa man mohak shvet haraa
bhar dopaharee nit chaanv mile
sakhi jhool jhulen chal neem tale
yah ped badaa sukhakaarak hai
yah poojit hai waradaayak hai
ati paawan praanahawaa isakee
man bhaawan sheetalataa isakee
ik deep dharen har shaam dhale
sakhi geet gunen chal neem tale
yah jaan bade gun hain isake
nit sewan paat karen isake
yah khoob puraatan aushadh hai
kadawaa ras shonit-shodhak hai
har gaanv shahar yah khoob phale
har rog mite sakhi neem tale
सखि चैत्र गया अब ताप बढ़ा।
धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।
ऋतु के सब रंग हुए गहरे।
जल स्रोत घटे जन जीव डरे।
फिर भी मन में इक आस पले।
सखि पाँव धरें चल नीम तले।
इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।
पर मीत यही अपवाद खड़ा।
खिलता रहता फल फूल भरा।
लगता मन मोहक श्वेत हरा।
भर दोपहरी नित छाँव मिले।
सखि झूल झुलें चल नीम तले।
यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।
यह पूजित है वरदायक है।
अति पावन प्राणहवा इसकी।
मन भावन शीतलता इसकी।
इक दीप धरें हर शाम ढले।
सखि गीत गुनें चल नीम तले।
यह जान बड़े गुण हैं इसके।
नित सेवन पात करें इसके।
यह खूब पुरातन औषध है।
कड़वा रस शोणित-शोधक है।
हर गाँव शहर यह खूब फले।
हर रोग मिटे सखि नीम तले।