कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १४० / १६३ № 140 of 163 रचना १४० / १६३
१२ नवम्बर २०१९ 12 November 2019 १२ नवम्बर २०१९

सखि नीम तले वर्णिक छंद में रचित गीत sakhi neem tale warnik chand men rachit geet सखि नीम तले वर्णिक छंद में रचित गीत

सखि चैत्र गया अब ताप बढ़ा।

धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।

ऋतु के सब रंग हुए गहरे।

जल स्रोत घटे जन जीव डरे।

फिर भी मन में इक आस पले।

सखि पाँव धरें चल नीम तले।

इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।

पर मीत यही अपवाद खड़ा।

खिलता रहता फल फूल भरा।

लगता मन मोहक श्वेत हरा।

भर दोपहरी नित छाँव मिले।

सखि झूल झुलें चल नीम तले।

यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।

यह पूजित है वरदायक है।

अति पावन प्राणहवा इसकी।

मन भावन शीतलता इसकी।

इक दीप धरें हर शाम ढले।

सखि गीत गुनें चल नीम तले।

यह जान बड़े गुण हैं इसके।

नित सेवन पात करें इसके।

यह खूब पुरातन औषध है।

कड़वा रस शोणित-शोधक है।

हर गाँव शहर यह खूब फले।

हर रोग मिटे सखि नीम तले।

sakhi chaitr gayaa ab taap bढ़aa

dharatee chatakee sir soory chढ़aa

riitu ke sab rang hue gahare

jal srot ghate jan jeew dare

·

phir bhee man men ik aas pale

sakhi paanv dharen chal neem tale

·

is mausam men har ped jhadaa

par meet yahee apawaad khadaa

khilataa rahataa phal phool bharaa

lagataa man mohak shvet haraa

·

bhar dopaharee nit chaanv mile

sakhi jhool jhulen chal neem tale

·

yah ped badaa sukhakaarak hai

yah poojit hai waradaayak hai

ati paawan praanahawaa isakee

man bhaawan sheetalataa isakee

·

ik deep dharen har shaam dhale

sakhi geet gunen chal neem tale

·

yah jaan bade gun hain isake

nit sewan paat karen isake

yah khoob puraatan aushadh hai

kadawaa ras shonit-shodhak hai

·

har gaanv shahar yah khoob phale

har rog mite sakhi neem tale

सखि चैत्र गया अब ताप बढ़ा।

धरती चटकी सिर सूर्य चढ़ा।

ऋतु के सब रंग हुए गहरे।

जल स्रोत घटे जन जीव डरे।

फिर भी मन में इक आस पले।

सखि पाँव धरें चल नीम तले।

इस मौसम में हर पेड़ झड़ा।

पर मीत यही अपवाद खड़ा।

खिलता रहता फल फूल भरा।

लगता मन मोहक श्वेत हरा।

भर दोपहरी नित छाँव मिले।

सखि झूल झुलें चल नीम तले।

यह पेड़ बड़ा सुखकारक है।

यह पूजित है वरदायक है।

अति पावन प्राणहवा इसकी।

मन भावन शीतलता इसकी।

इक दीप धरें हर शाम ढले।

सखि गीत गुनें चल नीम तले।

यह जान बड़े गुण हैं इसके।

नित सेवन पात करें इसके।

यह खूब पुरातन औषध है।

कड़वा रस शोणित-शोधक है।

हर गाँव शहर यह खूब फले।

हर रोग मिटे सखि नीम तले।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗