फूल तुम्हें मैं कहाँ सजाऊँ phool tumhen main kahaan sajaaoon फूल तुम्हें मैं कहाँ सजाऊँ
फूल तुम्हें मैं कहाँ सजाऊँ?
जहाँ सदा मुस्काता पाऊँ।
सोचूँ यही।
तुम्हें चढ़ाऊँ देव चरण में
बाद प्रवाहित कर दूँ जल में।
गलकर होगा अंत तुम्हारा
पानी दूषित होगा पल में।
ना ना नहीं।
सुंदरता के कदम तले गर
तुम्हें सजाऊँ सुमन बिछाकर।
कुचल जाय सौंदर्य तुम्हारा
होगा यह अपमान सरासर।
बिलकुल नहीं।
गजरे में जो करूँ सुशोभित
महतों का माला से स्वागत।
मगर सुमन मैं नहीं चाहती
फेंके जाओ बनो तिरस्कृत।
ऊँ हूँ नहीं।
यदि फैलाऊँ वीरों के पथ
घनी धूल से होगे लथपथ।
हश्र तुम्हारा देख देख कर
वीरों का मन होगा विचलित।
उफ्फ़ोह! नहीं।
तुम तो बने रहो बगिया में
महको इस सुंदर दुनिया में।
वंश बढ़ाओ परिवर्धित हो
शुद्ध हवाएँ बहें फिजा में।
चाहूँ यही।
phool tumhen main kahaan sajaaoon?
jahaan sadaa muskaataa paaoon
sochoon yahee
tumhen chढ़aaoon dew charan men
baad prawaahit kar doon jal men
galakar hogaa ant tumhaaraa
paanee dooshit hogaa pal men
naa naa naheen
sundarataa ke kadam tale gar
tumhen sajaaoon suman bichaakar
kuchal jaay saundary tumhaaraa
hogaa yah apamaan saraasar
bilakul naheen
gajare men jo karoon sushobhit
mahaton kaa maalaa se svaagat
magar suman main naheen chaahatee
phenke jaao bano tiraskriit
oon hoon naheen
yadi phailaaoon weeron ke path
ghanee dhool se hoge lathapath
hashr tumhaaraa dekh dekh kar
weeron kaa man hogaa wichalit
uphfoh! naheen
tum to bane raho bagiyaa men
mahako is sundar duniyaa men
wansh bढ़aao pariwardhit ho
shuddh hawaaen bahen phijaa men
chaahoon yahee
फूल तुम्हें मैं कहाँ सजाऊँ?
जहाँ सदा मुस्काता पाऊँ।
सोचूँ यही।
तुम्हें चढ़ाऊँ देव चरण में
बाद प्रवाहित कर दूँ जल में।
गलकर होगा अंत तुम्हारा
पानी दूषित होगा पल में।
ना ना नहीं।
सुंदरता के कदम तले गर
तुम्हें सजाऊँ सुमन बिछाकर।
कुचल जाय सौंदर्य तुम्हारा
होगा यह अपमान सरासर।
बिलकुल नहीं।
गजरे में जो करूँ सुशोभित
महतों का माला से स्वागत।
मगर सुमन मैं नहीं चाहती
फेंके जाओ बनो तिरस्कृत।
ऊँ हूँ नहीं।
यदि फैलाऊँ वीरों के पथ
घनी धूल से होगे लथपथ।
हश्र तुम्हारा देख देख कर
वीरों का मन होगा विचलित।
उफ्फ़ोह! नहीं।
तुम तो बने रहो बगिया में
महको इस सुंदर दुनिया में।
वंश बढ़ाओ परिवर्धित हो
शुद्ध हवाएँ बहें फिजा में।
चाहूँ यही।