कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५५ / १६३ № 55 of 163 रचना ५५ / १६३
२९ जनवरी २०१४ 29 January 2014 २९ जनवरी २०१४

दिवस हो चले कोमल कोमल diwas ho chale komal komal दिवस हो चले कोमल कोमल

सर्द हवा ने बिस्तर बाँधा

दिवस हो चले कोमल कोमल।

सूरज ने कुहरे को निगला।

ताप बढ़ा,

कुछ पारा उछला।

हिमगिरि पिघले, सागर सँभले

निरख नदी,

बढ़ चली चंचला।

खुली धूप से खिलीं वादियाँ

लगे झूमने निर्झर कल-कल।

नगमें सुना रही फुलवारी

गूँज उठी भोली

किलकारी

खिलती कलियाँ

देख-देखकर

भँवरों पर छा गई

खुमारी।

देख तितलियाँ,

sard hawaa ne bistar baandhaa

diwas ho chale komal komal

sooraj ne kuhare ko nigalaa

·

taap bढ़aa,

kuch paaraa uchalaa

·

himagiri pighale, saagar sanbhale

·

nirakh nadee,

bढ़ chalee chanchalaa

·

khulee dhoop se khileen waadiyaan

·

lage jhoomane nirjhar kal-kal

·

nagamen sunaa rahee phulawaaree

·

goonj uthee bholee

kilakaaree

·

khilatee kaliyaan

dekh-dekhakar

·

bhanvaron par chaa gaee

khumaaree

·

dekh titaliyaan,

सर्द हवा ने बिस्तर बाँधा

दिवस हो चले कोमल कोमल।

सूरज ने कुहरे को निगला।

ताप बढ़ा,

कुछ पारा उछला।

हिमगिरि पिघले, सागर सँभले

निरख नदी,

बढ़ चली चंचला।

खुली धूप से खिलीं वादियाँ

लगे झूमने निर्झर कल-कल।

नगमें सुना रही फुलवारी

गूँज उठी भोली

किलकारी

खिलती कलियाँ

देख-देखकर

भँवरों पर छा गई

खुमारी।

देख तितलियाँ,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗