ऋतु बसंत आई riitu basant aaee ऋतु बसंत आई
लदे बौर, शाखें सजीं
सुरभित अमराई।
ऋतु बसंत आई।
कोयल कुहकी बाग में
आम्रकुंज महका।
मधुरिम रसित सुगंध से
विहग वृंद बहका।
पुष्प लताओं का जिया
झूम-झूम लहका।
पवन बसंती गा उठी
गूँजी शहनाई।
खूब सुना है बसंत में
टेसू
खिलते हैं।
गुलमोहर, कचनार के
सुमन सँवरते हैं।
विजन वनों की गोद में
विचरण करते हैं।
मिलने को बेचैन थी
वन को मैं धाई।
lade baur, shaakhen sajeen
surabhit amaraaee
riitu basant aaee
koyal kuhakee baag men
aamrakunj mahakaa
madhurim rasit sugandh se
wihag wriind bahakaa
pushp lataaon kaa jiyaa
jhoom-jhoom lahakaa
pawan basantee gaa uthee
goonjee shahanaaee
khoob sunaa hai basant men
tesoo
khilate hain
gulamohar, kachanaar ke
suman sanvarate hain
wijan wanon kee god men
wicharan karate hain
milane ko bechain thee
wan ko main dhaaee
लदे बौर, शाखें सजीं
सुरभित अमराई।
ऋतु बसंत आई।
कोयल कुहकी बाग में
आम्रकुंज महका।
मधुरिम रसित सुगंध से
विहग वृंद बहका।
पुष्प लताओं का जिया
झूम-झूम लहका।
पवन बसंती गा उठी
गूँजी शहनाई।
खूब सुना है बसंत में
टेसू
खिलते हैं।
गुलमोहर, कचनार के
सुमन सँवरते हैं।
विजन वनों की गोद में
विचरण करते हैं।
मिलने को बेचैन थी
वन को मैं धाई।