कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५३ / १६३ № 53 of 163 रचना ५३ / १६३
८ जनवरी २०१४ 8 January 2014 ८ जनवरी २०१४

ऋतु बसंत आई riitu basant aaee ऋतु बसंत आई

लदे बौर, शाखें सजीं

सुरभित अमराई।

ऋतु बसंत आई।

कोयल कुहकी बाग में

आम्रकुंज महका।

मधुरिम रसित सुगंध से

विहग वृंद बहका।

पुष्प लताओं का जिया

झूम-झूम लहका।

पवन बसंती गा उठी

गूँजी शहनाई।

खूब सुना है बसंत में

टेसू

खिलते हैं।

गुलमोहर, कचनार के

सुमन सँवरते हैं।

विजन वनों की गोद में

विचरण करते हैं।

मिलने को बेचैन थी

वन को मैं धाई।

lade baur, shaakhen sajeen

·

surabhit amaraaee

·

riitu basant aaee

·

koyal kuhakee baag men

·

aamrakunj mahakaa

·

madhurim rasit sugandh se

·

wihag wriind bahakaa

·

pushp lataaon kaa jiyaa

·

jhoom-jhoom lahakaa

·

pawan basantee gaa uthee

·

goonjee shahanaaee

·

khoob sunaa hai basant men

·

tesoo

khilate hain

·

gulamohar, kachanaar ke

·

suman sanvarate hain

·

wijan wanon kee god men

·

wicharan karate hain

·

milane ko bechain thee

·

wan ko main dhaaee

लदे बौर, शाखें सजीं

सुरभित अमराई।

ऋतु बसंत आई।

कोयल कुहकी बाग में

आम्रकुंज महका।

मधुरिम रसित सुगंध से

विहग वृंद बहका।

पुष्प लताओं का जिया

झूम-झूम लहका।

पवन बसंती गा उठी

गूँजी शहनाई।

खूब सुना है बसंत में

टेसू

खिलते हैं।

गुलमोहर, कचनार के

सुमन सँवरते हैं।

विजन वनों की गोद में

विचरण करते हैं।

मिलने को बेचैन थी

वन को मैं धाई।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗