मन पतंगों संग उड़ना चाहता है man patangon sang udanaa chaahataa hai मन पतंगों संग उड़ना चाहता है
मन पतंगों संग उड़ना चाहता है।
लग रहा मौसम बदलना चाहता है।
बढ़ चले दिन, कद हुआ कम, शीत ऋतु का
धीरे-धीरे तन पिघलना चाहता है।
चलते-चलते रुख बदल उत्तर दिशा को
सूर्य बन-ठन कर टहलना चाहता है।
काँपता था बर्फ बारिश में जो शब भर
भोर को वो गुल निरखना चाहता है।
नीड़ में दुबका पखेरू मुक्त होकर
डाली-डाली पर विचरना चाहता है।
हो चला शोणित तरल, जीवन सरलतम।
हर कदम आगे को बढ़ना चाहता है।
ज्यों घुले गुड़-तिल, मिले दिल, मुग्ध जन-जन
प्रेम-रस का स्वाद चखना चाहता है।
- कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
man patangon sang udanaa chaahataa hai
lag rahaa mausam badalanaa chaahataa hai
bढ़ chale din, kad huaa kam, sheet riitu kaa
dheere-dheere tan pighalanaa chaahataa hai
chalate-chalate rukh badal uttar dishaa ko
soory ban-than kar tahalanaa chaahataa hai
kaanpataa thaa barph baarish men jo shab bhar
bhor ko wo gul nirakhanaa chaahataa hai
need men dubakaa pakheroo mukt hokar
daalee-daalee par wicharanaa chaahataa hai
ho chalaa shonit taral, jeewan saralatam
har kadam aage ko bढ़naa chaahataa hai
jyon ghule gud-til, mile dil, mugdh jan-jan
prem-ras kaa svaad chakhanaa chaahataa hai
- kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
मन पतंगों संग उड़ना चाहता है।
लग रहा मौसम बदलना चाहता है।
बढ़ चले दिन, कद हुआ कम, शीत ऋतु का
धीरे-धीरे तन पिघलना चाहता है।
चलते-चलते रुख बदल उत्तर दिशा को
सूर्य बन-ठन कर टहलना चाहता है।
काँपता था बर्फ बारिश में जो शब भर
भोर को वो गुल निरखना चाहता है।
नीड़ में दुबका पखेरू मुक्त होकर
डाली-डाली पर विचरना चाहता है।
हो चला शोणित तरल, जीवन सरलतम।
हर कदम आगे को बढ़ना चाहता है।
ज्यों घुले गुड़-तिल, मिले दिल, मुग्ध जन-जन
प्रेम-रस का स्वाद चखना चाहता है।
- कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
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-कल्पना रामानी