कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५२ / १६४ № 52 of 164 रचना ५२ / १६४
८ जनवरी २०१४ 8 January 2014 ८ जनवरी २०१४

महका- महका mahakaa- mahakaa महका- महका

युग बीते,

कई सदियाँ गईं,

॥

पर कुदरत के हैं नियम वही।

॥

क्यों मनुष तुम्हारा मन बहका?

॥

क्यों कर्म नहीं महका-महका।

॥

बादल ने बाँधा बूँदों को,

॥

जब बरसे जग को प्राण मिले।

॥

है धूप धरोहर सूरज की,

॥

झाँके कष्टों से त्राण मिले,

॥

कुदरत से सब पाया तुमने,

॥

अनगिनत तुम्हें वरदान मिले।

॥

क्या तुमने मान किया उनका?

॥

क्यों ज्ञान नहीं महका-महका।

॥

तरुवर सब देते फल

yug beete,

kaee sadiyaan gaeen,

·

par kudarat ke hain niyam wahee

·

kyon manush tumhaaraa man bahakaa?

·

kyon karm naheen mahakaa-mahakaa

·

baadal ne baandhaa boondon ko,

·

jab barase jag ko praan mile

·

hai dhoop dharohar sooraj kee,

·

jhaanke kashton se traan mile,

·

kudarat se sab paayaa tumane,

·

anaginat tumhen waradaan mile

·

kyaa tumane maan kiyaa unakaa?

·

kyon jnaan naheen mahakaa-mahakaa

·

taruwar sab dete phal

युग बीते,

कई सदियाँ गईं,

॥

पर कुदरत के हैं नियम वही।

॥

क्यों मनुष तुम्हारा मन बहका?

॥

क्यों कर्म नहीं महका-महका।

॥

बादल ने बाँधा बूँदों को,

॥

जब बरसे जग को प्राण मिले।

॥

है धूप धरोहर सूरज की,

॥

झाँके कष्टों से त्राण मिले,

॥

कुदरत से सब पाया तुमने,

॥

अनगिनत तुम्हें वरदान मिले।

॥

क्या तुमने मान किया उनका?

॥

क्यों ज्ञान नहीं महका-महका।

॥

तरुवर सब देते फल

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗