महका- महका mahakaa- mahakaa महका- महका
युग बीते,
कई सदियाँ गईं,
पर कुदरत के हैं नियम वही।
क्यों मनुष तुम्हारा मन बहका?
क्यों कर्म नहीं महका-महका।
बादल ने बाँधा बूँदों को,
जब बरसे जग को प्राण मिले।
है धूप धरोहर सूरज की,
झाँके कष्टों से त्राण मिले,
कुदरत से सब पाया तुमने,
अनगिनत तुम्हें वरदान मिले।
क्या तुमने मान किया उनका?
क्यों ज्ञान नहीं महका-महका।
तरुवर सब देते फल
yug beete,
kaee sadiyaan gaeen,
par kudarat ke hain niyam wahee
kyon manush tumhaaraa man bahakaa?
kyon karm naheen mahakaa-mahakaa
baadal ne baandhaa boondon ko,
jab barase jag ko praan mile
hai dhoop dharohar sooraj kee,
jhaanke kashton se traan mile,
kudarat se sab paayaa tumane,
anaginat tumhen waradaan mile
kyaa tumane maan kiyaa unakaa?
kyon jnaan naheen mahakaa-mahakaa
taruwar sab dete phal
युग बीते,
कई सदियाँ गईं,
पर कुदरत के हैं नियम वही।
क्यों मनुष तुम्हारा मन बहका?
क्यों कर्म नहीं महका-महका।
बादल ने बाँधा बूँदों को,
जब बरसे जग को प्राण मिले।
है धूप धरोहर सूरज की,
झाँके कष्टों से त्राण मिले,
कुदरत से सब पाया तुमने,
अनगिनत तुम्हें वरदान मिले।
क्या तुमने मान किया उनका?
क्यों ज्ञान नहीं महका-महका।
तरुवर सब देते फल