कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २९ / ६५ № 29 of 65 रचना २९ / ६५
९ जनवरी २०१४ 9 January 2014 ९ जनवरी २०१४

सार छंद-यह सर्कस का खेला saar chand-yah sarkas kaa khelaa सार छंद-यह सर्कस का खेला

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, भरा हुआ है

मेला।

कितना

है रोमांचक देखो, यह

सर्कस का खेला ।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, ये भोले से

मुखड़े।

खुशियाँ

बाँट छिपाते अपने, हिय

में दारुण दुखड़े।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, आहा!

गजब तमाशा।

दौड़

रही रस्सी के पुल पर, एक

असीमित आशा।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, जग इससे

अनजाना।

आज

यहाँ, कल कहाँ

मिलेगा, इनको ठौर

ठिकाना।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया,

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, bharaa huaa hai

melaa

·

kitanaa

hai romaanchak dekho, yah

sarkas kaa khelaa

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, ye bhole se

mukhade

·

khushiyaan

baant chipaate apane, hiy

men daarun dukhade

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, aahaa!

gajab tamaashaa

·

daud

rahee rassee ke pul par, ek

aseemit aashaa

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, jag isase

anajaanaa

·

aaj

yahaan, kal kahaan

milegaa, inako thaur

thikaanaa

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa,

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, भरा हुआ है

मेला।

कितना

है रोमांचक देखो, यह

सर्कस का खेला ।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, ये भोले से

मुखड़े।

खुशियाँ

बाँट छिपाते अपने, हिय

में दारुण दुखड़े।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, आहा!

गजब तमाशा।

दौड़

रही रस्सी के पुल पर, एक

असीमित आशा।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, जग इससे

अनजाना।

आज

यहाँ, कल कहाँ

मिलेगा, इनको ठौर

ठिकाना।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗