कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३० / ६७ № 30 of 67 रचना ३० / ६७
९ जनवरी २०१४ 9 January 2014 ९ जनवरी २०१४

सार छंद-यह सर्कस का खेला saar chand-yah sarkas kaa khelaa सार छंद-यह सर्कस का खेला

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, भरा हुआ है

मेला।

॥

कितना

है रोमांचक देखो, यह

सर्कस का खेला ।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, ये भोले से

मुखड़े।

॥

खुशियाँ

बाँट छिपाते अपने, हिय

में दारुण दुखड़े।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, आहा!

गजब तमाशा।

॥

दौड़

रही रस्सी के पुल पर, एक

असीमित आशा।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, जग इससे

अनजाना।

॥

आज

यहाँ, कल कहाँ

मिलेगा, इनको ठौर

ठिकाना।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया,

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, bharaa huaa hai

melaa

·

kitanaa

hai romaanchak dekho, yah

sarkas kaa khelaa

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, ye bhole se

mukhade

·

khushiyaan

baant chipaate apane, hiy

men daarun dukhade

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, aahaa!

gajab tamaashaa

·

daud

rahee rassee ke pul par, ek

aseemit aashaa

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, jag isase

anajaanaa

·

aaj

yahaan, kal kahaan

milegaa, inako thaur

thikaanaa

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa,

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, भरा हुआ है

मेला।

॥

कितना

है रोमांचक देखो, यह

सर्कस का खेला ।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, ये भोले से

मुखड़े।

॥

खुशियाँ

बाँट छिपाते अपने, हिय

में दारुण दुखड़े।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, आहा!

गजब तमाशा।

॥

दौड़

रही रस्सी के पुल पर, एक

असीमित आशा।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, जग इससे

अनजाना।

॥

आज

यहाँ, कल कहाँ

मिलेगा, इनको ठौर

ठिकाना।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗