कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १३२ / १६४ № 132 of 164 रचना १३२ / १६४
४ नवम्बर २०१९ 4 November 2019 ४ नवम्बर २०१९

अनजन्मी बेटी anajanmee betee अनजन्मी बेटी

बोल उठी अनजन्मी बेटी

तुमसे मेरा नाता न्यारा।

माँ मेरी! मैं अंश तुम्हारा

मुझे बचा लो वंश तुम्हारा।

॥

कुदरत से मैंने हक पाए

मेरा दम क्यों घोंटा जाए?

तुम जननी हो जीवन दाई

जग बैरी चाहे बन जाए।

॥

दे दो अपना सदय सहारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

॥

माँ तुम गाओ सुमधुर लोरी

स्वर्ण हिंडोला रेशम डोरी।

निष्ठुर जग का करो सामना

कहीं साधना रहे न कोरी।

॥

थमे न मेरा पलना प्यारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

॥

माँ मुझको सपने गढ़ने दो

अपनी प्रेम-लता बढ़ने दो।

अमृत पय से सहज सींचकर

हर ऊँचाई पर चढ़ने दो।

॥

दिखला दो प्रातः का तारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

॥

माँ यदि किया विसर्जन मेरा

नहीं दिखाया मुझे सवेरा।

मनुष-वंश क्या लुप्त न होगा?

तोड़ा अगर सृष्टि का घेरा!

॥

मत रोको बहती जल धारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

bol uthee anajanmee betee

tumase meraa naataa nyaaraa

maan meree! main ansh tumhaaraa

mujhe bachaa lo wansh tumhaaraa

·

kudarat se mainne hak paae

meraa dam kyon ghontaa jaae?

tum jananee ho jeewan daaee

jag bairee chaahe ban jaae

·

de do apanaa saday sahaaraa

maan meree main ansh tumhaaraa

·

maan tum gaao sumadhur loree

svarn hindolaa resham doree

nishthur jag kaa karo saamanaa

kaheen saadhanaa rahe n koree

·

thame n meraa palanaa pyaaraa

maan meree main ansh tumhaaraa

·

maan mujhako sapane gढ़ne do

apanee prem-lataa bढ़ne do

amriit pay se sahaj seenchakar

har oonchaaee par chढ़ne do

·

dikhalaa do praatah kaa taaraa

maan meree main ansh tumhaaraa

·

maan yadi kiyaa wisarjan meraa

naheen dikhaayaa mujhe saweraa

manush-wansh kyaa lupt n hogaa?

todaa agar sriishti kaa gheraa!

·

mat roko bahatee jal dhaaraa

maan meree main ansh tumhaaraa

बोल उठी अनजन्मी बेटी

तुमसे मेरा नाता न्यारा।

माँ मेरी! मैं अंश तुम्हारा

मुझे बचा लो वंश तुम्हारा।

॥

कुदरत से मैंने हक पाए

मेरा दम क्यों घोंटा जाए?

तुम जननी हो जीवन दाई

जग बैरी चाहे बन जाए।

॥

दे दो अपना सदय सहारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

॥

माँ तुम गाओ सुमधुर लोरी

स्वर्ण हिंडोला रेशम डोरी।

निष्ठुर जग का करो सामना

कहीं साधना रहे न कोरी।

॥

थमे न मेरा पलना प्यारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

॥

माँ मुझको सपने गढ़ने दो

अपनी प्रेम-लता बढ़ने दो।

अमृत पय से सहज सींचकर

हर ऊँचाई पर चढ़ने दो।

॥

दिखला दो प्रातः का तारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

॥

माँ यदि किया विसर्जन मेरा

नहीं दिखाया मुझे सवेरा।

मनुष-वंश क्या लुप्त न होगा?

तोड़ा अगर सृष्टि का घेरा!

॥

मत रोको बहती जल धारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗