कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १३१ / १६३ № 131 of 163 रचना १३१ / १६३
४ नवम्बर २०१९ 4 November 2019 ४ नवम्बर २०१९

अनजन्मी बेटी anajanmee betee अनजन्मी बेटी

बोल उठी अनजन्मी बेटी

तुमसे मेरा नाता न्यारा।

माँ मेरी! मैं अंश तुम्हारा

मुझे बचा लो वंश तुम्हारा।

कुदरत से मैंने हक पाए

मेरा दम क्यों घोंटा जाए?

तुम जननी हो जीवन दाई

जग बैरी चाहे बन जाए।

दे दो अपना सदय सहारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

माँ तुम गाओ सुमधुर लोरी

स्वर्ण हिंडोला रेशम डोरी।

निष्ठुर जग का करो सामना

कहीं साधना रहे न कोरी।

थमे न मेरा पलना प्यारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

माँ मुझको सपने गढ़ने दो

अपनी प्रेम-लता बढ़ने दो।

अमृत पय से सहज सींचकर

हर ऊँचाई पर चढ़ने दो।

दिखला दो प्रातः का तारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

माँ यदि किया विसर्जन मेरा

नहीं दिखाया मुझे सवेरा।

मनुष-वंश क्या लुप्त न होगा?

तोड़ा अगर सृष्टि का घेरा!

मत रोको बहती जल धारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

bol uthee anajanmee betee

tumase meraa naataa nyaaraa

maan meree! main ansh tumhaaraa

mujhe bachaa lo wansh tumhaaraa

·

kudarat se mainne hak paae

meraa dam kyon ghontaa jaae?

tum jananee ho jeewan daaee

jag bairee chaahe ban jaae

·

de do apanaa saday sahaaraa

maan meree main ansh tumhaaraa

·

maan tum gaao sumadhur loree

svarn hindolaa resham doree

nishthur jag kaa karo saamanaa

kaheen saadhanaa rahe n koree

·

thame n meraa palanaa pyaaraa

maan meree main ansh tumhaaraa

·

maan mujhako sapane gढ़ne do

apanee prem-lataa bढ़ne do

amriit pay se sahaj seenchakar

har oonchaaee par chढ़ne do

·

dikhalaa do praatah kaa taaraa

maan meree main ansh tumhaaraa

·

maan yadi kiyaa wisarjan meraa

naheen dikhaayaa mujhe saweraa

manush-wansh kyaa lupt n hogaa?

todaa agar sriishti kaa gheraa!

·

mat roko bahatee jal dhaaraa

maan meree main ansh tumhaaraa

बोल उठी अनजन्मी बेटी

तुमसे मेरा नाता न्यारा।

माँ मेरी! मैं अंश तुम्हारा

मुझे बचा लो वंश तुम्हारा।

कुदरत से मैंने हक पाए

मेरा दम क्यों घोंटा जाए?

तुम जननी हो जीवन दाई

जग बैरी चाहे बन जाए।

दे दो अपना सदय सहारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

माँ तुम गाओ सुमधुर लोरी

स्वर्ण हिंडोला रेशम डोरी।

निष्ठुर जग का करो सामना

कहीं साधना रहे न कोरी।

थमे न मेरा पलना प्यारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

माँ मुझको सपने गढ़ने दो

अपनी प्रेम-लता बढ़ने दो।

अमृत पय से सहज सींचकर

हर ऊँचाई पर चढ़ने दो।

दिखला दो प्रातः का तारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

माँ यदि किया विसर्जन मेरा

नहीं दिखाया मुझे सवेरा।

मनुष-वंश क्या लुप्त न होगा?

तोड़ा अगर सृष्टि का घेरा!

मत रोको बहती जल धारा

माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗