अनजन्मी बेटी anajanmee betee अनजन्मी बेटी
बोल उठी अनजन्मी बेटी
तुमसे मेरा नाता न्यारा।
माँ मेरी! मैं अंश तुम्हारा
मुझे बचा लो वंश तुम्हारा।
कुदरत से मैंने हक पाए
मेरा दम क्यों घोंटा जाए?
तुम जननी हो जीवन दाई
जग बैरी चाहे बन जाए।
दे दो अपना सदय सहारा
माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।
माँ तुम गाओ सुमधुर लोरी
स्वर्ण हिंडोला रेशम डोरी।
निष्ठुर जग का करो सामना
कहीं साधना रहे न कोरी।
थमे न मेरा पलना प्यारा
माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।
माँ मुझको सपने गढ़ने दो
अपनी प्रेम-लता बढ़ने दो।
अमृत पय से सहज सींचकर
हर ऊँचाई पर चढ़ने दो।
दिखला दो प्रातः का तारा
माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।
माँ यदि किया विसर्जन मेरा
नहीं दिखाया मुझे सवेरा।
मनुष-वंश क्या लुप्त न होगा?
तोड़ा अगर सृष्टि का घेरा!
मत रोको बहती जल धारा
माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।
bol uthee anajanmee betee
tumase meraa naataa nyaaraa
maan meree! main ansh tumhaaraa
mujhe bachaa lo wansh tumhaaraa
kudarat se mainne hak paae
meraa dam kyon ghontaa jaae?
tum jananee ho jeewan daaee
jag bairee chaahe ban jaae
de do apanaa saday sahaaraa
maan meree main ansh tumhaaraa
maan tum gaao sumadhur loree
svarn hindolaa resham doree
nishthur jag kaa karo saamanaa
kaheen saadhanaa rahe n koree
thame n meraa palanaa pyaaraa
maan meree main ansh tumhaaraa
maan mujhako sapane gढ़ne do
apanee prem-lataa bढ़ne do
amriit pay se sahaj seenchakar
har oonchaaee par chढ़ne do
dikhalaa do praatah kaa taaraa
maan meree main ansh tumhaaraa
maan yadi kiyaa wisarjan meraa
naheen dikhaayaa mujhe saweraa
manush-wansh kyaa lupt n hogaa?
todaa agar sriishti kaa gheraa!
mat roko bahatee jal dhaaraa
maan meree main ansh tumhaaraa
बोल उठी अनजन्मी बेटी
तुमसे मेरा नाता न्यारा।
माँ मेरी! मैं अंश तुम्हारा
मुझे बचा लो वंश तुम्हारा।
कुदरत से मैंने हक पाए
मेरा दम क्यों घोंटा जाए?
तुम जननी हो जीवन दाई
जग बैरी चाहे बन जाए।
दे दो अपना सदय सहारा
माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।
माँ तुम गाओ सुमधुर लोरी
स्वर्ण हिंडोला रेशम डोरी।
निष्ठुर जग का करो सामना
कहीं साधना रहे न कोरी।
थमे न मेरा पलना प्यारा
माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।
माँ मुझको सपने गढ़ने दो
अपनी प्रेम-लता बढ़ने दो।
अमृत पय से सहज सींचकर
हर ऊँचाई पर चढ़ने दो।
दिखला दो प्रातः का तारा
माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।
माँ यदि किया विसर्जन मेरा
नहीं दिखाया मुझे सवेरा।
मनुष-वंश क्या लुप्त न होगा?
तोड़ा अगर सृष्टि का घेरा!
मत रोको बहती जल धारा
माँ मेरी मैं अंश तुम्हारा।