बेटी तुम सबका दुलार हो betee tum sabakaa dulaar ho बेटी तुम सबका दुलार हो
नव प्रभात की सूर्य किरण से
आलोकित घर का निखार हो।
आँगन की मृदु महक माधुरी
बेटी तुम सबका दुलार हो।
ब्रह्मा का उत्कृष्ट सृजन तुम।
निर्मल कोमल सुंदर तन तुम।
कर्म योगिनी स्वत्व स्वामिनी
स्वजनों की स्नेहिल पुकार हो
बेटी तुम सबका दुलार हो!
खिली खिली खुशरंग हिना तुम।
चंचल चतुर चारु-वदना तुम।
मृगनयनी मृदु बयन भाषिणी
मातृ-पितृ मन का मल्हार हो।
बेटी तुम सबका दुलार हो।
सप्त सुरों का साज वृंद तुम।
सुगम हास्य का मुक्त छंद तुम।
सुर सुबोधिनी रसित रागिनी
मधुर तान बजता सितार हो।
बेटी तुम सबका दुलार हो।
मधुबन की मोहक सुगंध तुम
नवरंगों का सुमन कुंज तुम
नव हरीतिमा नवल पीतिमा
ऋतु बसंत की नव बहार हो
बेटी तुम सबका दुलार हो।
naw prabhaat kee soory kiran se
aalokit ghar kaa nikhaar ho
aangan kee mriidu mahak maadhuree
betee tum sabakaa dulaar ho
brahmaa kaa utkriisht sriijan tum
nirmal komal sundar tan tum
karm yoginee svatv svaaminee
svajanon kee snehil pukaar ho
betee tum sabakaa dulaar ho!
khilee khilee khusharang hinaa tum
chanchal chatur chaaru-wadanaa tum
mriiganayanee mriidu bayan bhaashinee
maatrii-pitrii man kaa malhaar ho
betee tum sabakaa dulaar ho
sapt suron kaa saaj wriind tum
sugam haasy kaa mukt chand tum
sur subodhinee rasit raaginee
madhur taan bajataa sitaar ho
betee tum sabakaa dulaar ho
madhuban kee mohak sugandh tum
nawarangon kaa suman kunj tum
naw hareetimaa nawal peetimaa
riitu basant kee naw bahaar ho
betee tum sabakaa dulaar ho
नव प्रभात की सूर्य किरण से
आलोकित घर का निखार हो।
आँगन की मृदु महक माधुरी
बेटी तुम सबका दुलार हो।
ब्रह्मा का उत्कृष्ट सृजन तुम।
निर्मल कोमल सुंदर तन तुम।
कर्म योगिनी स्वत्व स्वामिनी
स्वजनों की स्नेहिल पुकार हो
बेटी तुम सबका दुलार हो!
खिली खिली खुशरंग हिना तुम।
चंचल चतुर चारु-वदना तुम।
मृगनयनी मृदु बयन भाषिणी
मातृ-पितृ मन का मल्हार हो।
बेटी तुम सबका दुलार हो।
सप्त सुरों का साज वृंद तुम।
सुगम हास्य का मुक्त छंद तुम।
सुर सुबोधिनी रसित रागिनी
मधुर तान बजता सितार हो।
बेटी तुम सबका दुलार हो।
मधुबन की मोहक सुगंध तुम
नवरंगों का सुमन कुंज तुम
नव हरीतिमा नवल पीतिमा
ऋतु बसंत की नव बहार हो
बेटी तुम सबका दुलार हो।