कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १३२ / १६३ № 132 of 163 रचना १३२ / १६३
४ नवम्बर २०१९ 4 November 2019 ४ नवम्बर २०१९

बेटी तुम सबका दुलार हो betee tum sabakaa dulaar ho बेटी तुम सबका दुलार हो

नव प्रभात की सूर्य किरण से

आलोकित घर का निखार हो।

आँगन की मृदु महक माधुरी

बेटी तुम सबका दुलार हो।

ब्रह्मा का उत्कृष्ट सृजन तुम।

निर्मल कोमल सुंदर तन तुम।

कर्म योगिनी स्वत्व स्वामिनी

स्वजनों की स्नेहिल पुकार हो

बेटी तुम सबका दुलार हो!

खिली खिली खुशरंग हिना तुम।

चंचल चतुर चारु-वदना तुम।

मृगनयनी मृदु बयन भाषिणी

मातृ-पितृ मन का मल्हार हो।

बेटी तुम सबका दुलार हो।

सप्त सुरों का साज वृंद तुम।

सुगम हास्य का मुक्त छंद तुम।

सुर सुबोधिनी रसित रागिनी

मधुर तान बजता सितार हो।

बेटी तुम सबका दुलार हो।

मधुबन की मोहक सुगंध तुम

नवरंगों का सुमन कुंज तुम

नव हरीतिमा नवल पीतिमा

ऋतु बसंत की नव बहार हो

बेटी तुम सबका दुलार हो।

naw prabhaat kee soory kiran se

aalokit ghar kaa nikhaar ho

aangan kee mriidu mahak maadhuree

betee tum sabakaa dulaar ho

·

brahmaa kaa utkriisht sriijan tum

nirmal komal sundar tan tum

karm yoginee svatv svaaminee

svajanon kee snehil pukaar ho

betee tum sabakaa dulaar ho!

·

khilee khilee khusharang hinaa tum

chanchal chatur chaaru-wadanaa tum

mriiganayanee mriidu bayan bhaashinee

maatrii-pitrii man kaa malhaar ho

betee tum sabakaa dulaar ho

·

sapt suron kaa saaj wriind tum

sugam haasy kaa mukt chand tum

sur subodhinee rasit raaginee

madhur taan bajataa sitaar ho

betee tum sabakaa dulaar ho

·

madhuban kee mohak sugandh tum

nawarangon kaa suman kunj tum

naw hareetimaa nawal peetimaa

riitu basant kee naw bahaar ho

betee tum sabakaa dulaar ho

नव प्रभात की सूर्य किरण से

आलोकित घर का निखार हो।

आँगन की मृदु महक माधुरी

बेटी तुम सबका दुलार हो।

ब्रह्मा का उत्कृष्ट सृजन तुम।

निर्मल कोमल सुंदर तन तुम।

कर्म योगिनी स्वत्व स्वामिनी

स्वजनों की स्नेहिल पुकार हो

बेटी तुम सबका दुलार हो!

खिली खिली खुशरंग हिना तुम।

चंचल चतुर चारु-वदना तुम।

मृगनयनी मृदु बयन भाषिणी

मातृ-पितृ मन का मल्हार हो।

बेटी तुम सबका दुलार हो।

सप्त सुरों का साज वृंद तुम।

सुगम हास्य का मुक्त छंद तुम।

सुर सुबोधिनी रसित रागिनी

मधुर तान बजता सितार हो।

बेटी तुम सबका दुलार हो।

मधुबन की मोहक सुगंध तुम

नवरंगों का सुमन कुंज तुम

नव हरीतिमा नवल पीतिमा

ऋतु बसंत की नव बहार हो

बेटी तुम सबका दुलार हो।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗