कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ११९ / १६४ № 119 of 164 रचना ११९ / १६४
६ फ़रवरी २०१६ 6 February 2016 ६ फ़रवरी २०१६

क्या कभी सोचा? kyaa kabhee sochaa? क्या कभी सोचा?

क्या कभी सोचा कि

चाहें

॥

गीत क्या विद्वान

से

॥

आजकल ये सुप्त रहते

॥

हैं अँधेरों में

सिमटकर

॥

क्योंकि मुखड़ा देख, इनका

॥

जन चले जाते पलटकर

॥

और कर जाते विभूषित

॥

नित नए उपमान से

॥

अंग कोई भंग करता

॥

कोई रस ही चूस लेता

॥

दाद खुद को दे सृजक

फिर

॥

नव-सृजन का नाम देता

॥

गीत अदना सा भला

कैसे

॥

भिड़े इंसान से

॥

भाव, भाषा,

छंद, रस-लय

॥

साथ सब ये गीत

माँगें

kyaa kabhee sochaa ki

chaahen

·

geet kyaa widvaan

se

·

aajakal ye supt rahate

·

hain andheron men

simatakar

·

kyonki mukhadaa dekh, inakaa

·

jan chale jaate palatakar

·

aur kar jaate wibhooshit

·

nit nae upamaan se

·

ang koee bhang karataa

·

koee ras hee choos letaa

·

daad khud ko de sriijak

phir

·

naw-sriijan kaa naam detaa

·

geet adanaa saa bhalaa

kaise

·

bhide insaan se

·

bhaaw, bhaashaa,

chand, ras-lay

·

saath sab ye geet

maangen

क्या कभी सोचा कि

चाहें

॥

गीत क्या विद्वान

से

॥

आजकल ये सुप्त रहते

॥

हैं अँधेरों में

सिमटकर

॥

क्योंकि मुखड़ा देख, इनका

॥

जन चले जाते पलटकर

॥

और कर जाते विभूषित

॥

नित नए उपमान से

॥

अंग कोई भंग करता

॥

कोई रस ही चूस लेता

॥

दाद खुद को दे सृजक

फिर

॥

नव-सृजन का नाम देता

॥

गीत अदना सा भला

कैसे

॥

भिड़े इंसान से

॥

भाव, भाषा,

छंद, रस-लय

॥

साथ सब ये गीत

माँगें

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗