कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६१ / १६३ № 61 of 163 रचना ६१ / १६३
६ मार्च २०१४ 6 March 2014 ६ मार्च २०१४

होली का संदेश holee kaa sandesh होली का संदेश

फागुन आया लिए साथ में, होली का संदेश। रंग भरे गुब्बारों में, हमजोली का संदेश। लुभा रहे मिष्ठान्न रँगीले। पूरनपोली पाक रसीले। स्वागत करती द्वार अल्पना, घुटी भंग के दौर नशीले। देख-देख मन लगा मचलने, सब्र नहीं अब शेष। मची युवाओं में धमाल है। मन अबीर केसर गुलाल है। ऋतु बसंत का न्यौता पाकर, उमड़ पड़ा जन जन कमाल है। तन रँगने को आतुर हैं गुल, टेसू बना विशेष। नव-वधुएँ भी रंग सँजोकर।

phaagun aayaa lie saath men, holee kaa sandesh rang bhare gubbaaron men, hamajolee kaa sandesh lubhaa rahe mishthaann rangeele pooranapolee paak raseele svaagat karatee dvaar alpanaa, ghutee bhang ke daur nasheele dekh-dekh man lagaa machalane, sabr naheen ab shesh machee yuwaaon men dhamaal hai man abeer kesar gulaal hai riitu basant kaa nyautaa paakar, umad padaa jan jan kamaal hai tan rangane ko aatur hain gul, tesoo banaa wishesh naw-wadhuen bhee rang sanjokar

फागुन आया लिए साथ में, होली का संदेश। रंग भरे गुब्बारों में, हमजोली का संदेश। लुभा रहे मिष्ठान्न रँगीले। पूरनपोली पाक रसीले। स्वागत करती द्वार अल्पना, घुटी भंग के दौर नशीले। देख-देख मन लगा मचलने, सब्र नहीं अब शेष। मची युवाओं में धमाल है। मन अबीर केसर गुलाल है। ऋतु बसंत का न्यौता पाकर, उमड़ पड़ा जन जन कमाल है। तन रँगने को आतुर हैं गुल, टेसू बना विशेष। नव-वधुएँ भी रंग सँजोकर।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗