वीरेश अरोड़ा "वीर"द्वारा नवगीत संग्रह "हौसलों के पंख" पर की हुई समीक्षा weeresh arodaa "weer"dvaaraa nawageet sangrah "hausalon ke pankh" par kee huee sameekshaa वीरेश अरोड़ा "वीर"द्वारा नवगीत संग्रह "हौसलों के पंख" पर की हुई समीक्षा
"हौसलों के पंख" आदरणीय कल्पना रामानी जी का प्रथम प्रकाशित काव्य संग्रह होते
हुए भी साहित्यिक ऊर्जा, काव्य
शिल्प की सुघड़ता व विचारों की परिपक्वता
से ओत-प्रोत है। कविताओं में भाषा की सरलता सरसता सहजता व हृदय ग्राहिता तो है ही, भावों की सौम्यता शुभ्रता भी पाठकों का
मन मोह लेने में पूर्णतः सक्षम है। नारी
कण्ठ की मधुरता होने के कारण "सोने में सुहागा" की उक्ति भी चरितार्थ
होती है। इस संकलन
"hausalon ke pankh" aadaraneey kalpanaa raamaanee jee kaa pratham prakaashit kaavy sangrah hote
hue bhee saahityik oorjaa, kaavy
shilp kee sughadataa w wichaaron kee paripakvataa
se ot-prot hai kawitaaon men bhaashaa kee saralataa sarasataa sahajataa w hriiday graahitaa to hai hee, bhaawon kee saumyataa shubhrataa bhee paathakon kaa
man moh lene men poornatah saksham hai naaree
kanth kee madhurataa hone ke kaaran "sone men suhaagaa" kee ukti bhee charitaarth
hotee hai is sankalan
"हौसलों के पंख" आदरणीय कल्पना रामानी जी का प्रथम प्रकाशित काव्य संग्रह होते
हुए भी साहित्यिक ऊर्जा, काव्य
शिल्प की सुघड़ता व विचारों की परिपक्वता
से ओत-प्रोत है। कविताओं में भाषा की सरलता सरसता सहजता व हृदय ग्राहिता तो है ही, भावों की सौम्यता शुभ्रता भी पाठकों का
मन मोह लेने में पूर्णतः सक्षम है। नारी
कण्ठ की मधुरता होने के कारण "सोने में सुहागा" की उक्ति भी चरितार्थ
होती है। इस संकलन