बेटियों आगे बढ़ो betiyon aage bढ़o बेटियों आगे बढ़ो
हक़ से हर अधिकार पाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
स्वप्न पूरे कर दिखाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
चाहे मावस रात हो,
जुगनू सितारे हों न हों
ज्योत बनकर जगमगाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
सिर तुम्हारा ना झुके,
अन्याय के आगे कभी
न्याय का डंका बजाने, बेटियों
आगे बढ़ो।
ज्ञान के विस्तृत फ़लक पर,
करके अपने दस्तखत
विश्व में सम्मान पाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
तुम सबल हो, बाँध
लो यह बात अपनी गाँठ में
क्यों सुनो अबला का ताने,
बेटियों आगे बढ़ो।
रूढ़ियों की रीढ़ तोड़ो, बेड़ियाँ
सब काट कर
दिलजलों के बुत जलाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
देखना सरकें नहीं वे,
सर्प जो तुमको डसें
विषधरों को विष पिलाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
सीख लो गुर निज सुरक्षा के,
सदा रहना सजग
दंभ को दर्पण दिखाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
गर्भ में ही फिर तुम्हारा, अंश
ना हो अस्तमित
“कल्पना” खुद को बचाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
haq se har adhikaar paane,
betiyon aage bढ़o
svapn poore kar dikhaane,
betiyon aage bढ़o
chaahe maawas raat ho,
juganoo sitaare hon n hon
jyot banakar jagamagaane,
betiyon aage bढ़o
sir tumhaaraa naa jhuke,
anyaay ke aage kabhee
nyaay kaa dankaa bajaane, betiyon
aage bढ़o
jnaan ke wistriit falak par,
karake apane dastakhat
wishv men sammaan paane,
betiyon aage bढ़o
tum sabal ho, baandh
lo yah baat apanee gaanth men
kyon suno abalaa kaa taane,
betiyon aage bढ़o
rooढ़iyon kee reeढ़ todo, bediyaan
sab kaat kar
dilajalon ke but jalaane,
betiyon aage bढ़o
dekhanaa saraken naheen we,
sarp jo tumako dasen
wishadharon ko wish pilaane,
betiyon aage bढ़o
seekh lo gur nij surakshaa ke,
sadaa rahanaa sajag
danbh ko darpan dikhaane,
betiyon aage bढ़o
garbh men hee phir tumhaaraa, ansh
naa ho astamit
“kalpanaa” khud ko bachaane,
betiyon aage bढ़o
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
हक़ से हर अधिकार पाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
स्वप्न पूरे कर दिखाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
चाहे मावस रात हो,
जुगनू सितारे हों न हों
ज्योत बनकर जगमगाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
सिर तुम्हारा ना झुके,
अन्याय के आगे कभी
न्याय का डंका बजाने, बेटियों
आगे बढ़ो।
ज्ञान के विस्तृत फ़लक पर,
करके अपने दस्तखत
विश्व में सम्मान पाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
तुम सबल हो, बाँध
लो यह बात अपनी गाँठ में
क्यों सुनो अबला का ताने,
बेटियों आगे बढ़ो।
रूढ़ियों की रीढ़ तोड़ो, बेड़ियाँ
सब काट कर
दिलजलों के बुत जलाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
देखना सरकें नहीं वे,
सर्प जो तुमको डसें
विषधरों को विष पिलाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
सीख लो गुर निज सुरक्षा के,
सदा रहना सजग
दंभ को दर्पण दिखाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
गर्भ में ही फिर तुम्हारा, अंश
ना हो अस्तमित
“कल्पना” खुद को बचाने,
बेटियों आगे बढ़ो।
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी