कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३७ / २०४ № 37 of 204 रचना ३७ / २०४
६ अप्रैल २०१४ 6 April 2014 ६ अप्रैल २०१४

बेटियों आगे बढ़ो betiyon aage bढ़o बेटियों आगे बढ़ो

हक़ से हर अधिकार पाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

स्वप्न पूरे कर दिखाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

चाहे मावस रात हो,

जुगनू सितारे हों न हों

ज्योत बनकर जगमगाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

सिर तुम्हारा ना झुके,

अन्याय के आगे कभी

न्याय का डंका बजाने, बेटियों

आगे बढ़ो।

ज्ञान के विस्तृत फ़लक पर,

करके अपने दस्तखत

विश्व में सम्मान पाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

तुम सबल हो, बाँध

लो यह बात अपनी गाँठ में

क्यों सुनो अबला का ताने,

बेटियों आगे बढ़ो।

रूढ़ियों की रीढ़ तोड़ो, बेड़ियाँ

सब काट कर

दिलजलों के बुत जलाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

देखना सरकें नहीं वे,

सर्प जो तुमको डसें

विषधरों को विष पिलाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

सीख लो गुर निज सुरक्षा के,

सदा रहना सजग

दंभ को दर्पण दिखाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

गर्भ में ही फिर तुम्हारा, अंश

ना हो अस्तमित

“कल्पना” खुद को बचाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

haq se har adhikaar paane,

betiyon aage bढ़o

·

svapn poore kar dikhaane,

betiyon aage bढ़o

·

chaahe maawas raat ho,

juganoo sitaare hon n hon

·

jyot banakar jagamagaane,

betiyon aage bढ़o

·

sir tumhaaraa naa jhuke,

anyaay ke aage kabhee

·

nyaay kaa dankaa bajaane, betiyon

aage bढ़o

·

jnaan ke wistriit falak par,

karake apane dastakhat

·

wishv men sammaan paane,

betiyon aage bढ़o

·

tum sabal ho, baandh

lo yah baat apanee gaanth men

·

kyon suno abalaa kaa taane,

betiyon aage bढ़o

·

rooढ़iyon kee reeढ़ todo, bediyaan

sab kaat kar

·

dilajalon ke but jalaane,

betiyon aage bढ़o

·

dekhanaa saraken naheen we,

sarp jo tumako dasen

·

wishadharon ko wish pilaane,

betiyon aage bढ़o

·

seekh lo gur nij surakshaa ke,

sadaa rahanaa sajag

·

danbh ko darpan dikhaane,

betiyon aage bढ़o

·

garbh men hee phir tumhaaraa, ansh

naa ho astamit

·

“kalpanaa” khud ko bachaane,

betiyon aage bढ़o

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हक़ से हर अधिकार पाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

स्वप्न पूरे कर दिखाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

चाहे मावस रात हो,

जुगनू सितारे हों न हों

ज्योत बनकर जगमगाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

सिर तुम्हारा ना झुके,

अन्याय के आगे कभी

न्याय का डंका बजाने, बेटियों

आगे बढ़ो।

ज्ञान के विस्तृत फ़लक पर,

करके अपने दस्तखत

विश्व में सम्मान पाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

तुम सबल हो, बाँध

लो यह बात अपनी गाँठ में

क्यों सुनो अबला का ताने,

बेटियों आगे बढ़ो।

रूढ़ियों की रीढ़ तोड़ो, बेड़ियाँ

सब काट कर

दिलजलों के बुत जलाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

देखना सरकें नहीं वे,

सर्प जो तुमको डसें

विषधरों को विष पिलाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

सीख लो गुर निज सुरक्षा के,

सदा रहना सजग

दंभ को दर्पण दिखाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

गर्भ में ही फिर तुम्हारा, अंश

ना हो अस्तमित

“कल्पना” खुद को बचाने,

बेटियों आगे बढ़ो।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗