कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९० / १६३ № 90 of 163 रचना ९० / १६३
१९ दिसम्बर २०१४ 19 December 2014 १९ दिसम्बर २०१४

सुबह सुबह... subah subah सुबह सुबह...

सुबह सुबह कानों में आकर

कहा किसी ने नमस्कार।

अलसाई आँखों से देखा।

सूर्य किरण की दिखी न रेखा।

नभ पर थे कुहरे के बादल,

नीचे भी कुहरा ही देखा।

जान गई मैं,

यह तो बदले,

मौसम का है चमत्कार।

खग सोए थे आँखें मींचे।

विहग नीड़ चूजों को भींचे।

दिन की राह ताकते जन-जन,

धुआँ धुआँ थे गलियाँ कूचे।

टुकड़ा धूप लपेटें तन पर,

सबको था बस इंतज़ार।

रात बड़ी दिन छोटे होंगे।

सर्द हवा के

subah subah kaanon men aakar

·

kahaa kisee ne namaskaar

·

alasaaee aankhon se dekhaa

·

soory kiran kee dikhee n rekhaa

·

nabh par the kuhare ke baadal,

·

neeche bhee kuharaa hee dekhaa

·

jaan gaee main,

yah to badale,

·

mausam kaa hai chamatkaar

·

khag soe the aankhen meenche

·

wihag need choojon ko bheenche

·

din kee raah taakate jan-jan,

·

dhuaan dhuaan the galiyaan kooche

·

tukadaa dhoop lapeten tan par,

·

sabako thaa bas intazaar

·

raat badee din chote honge

·

sard hawaa ke

सुबह सुबह कानों में आकर

कहा किसी ने नमस्कार।

अलसाई आँखों से देखा।

सूर्य किरण की दिखी न रेखा।

नभ पर थे कुहरे के बादल,

नीचे भी कुहरा ही देखा।

जान गई मैं,

यह तो बदले,

मौसम का है चमत्कार।

खग सोए थे आँखें मींचे।

विहग नीड़ चूजों को भींचे।

दिन की राह ताकते जन-जन,

धुआँ धुआँ थे गलियाँ कूचे।

टुकड़ा धूप लपेटें तन पर,

सबको था बस इंतज़ार।

रात बड़ी दिन छोटे होंगे।

सर्द हवा के

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗