सुबह सुबह... subah subah सुबह सुबह...
सुबह सुबह कानों में आकर
कहा किसी ने नमस्कार।
अलसाई आँखों से देखा।
सूर्य किरण की दिखी न रेखा।
नभ पर थे कुहरे के बादल,
नीचे भी कुहरा ही देखा।
जान गई मैं,
यह तो बदले,
मौसम का है चमत्कार।
खग सोए थे आँखें मींचे।
विहग नीड़ चूजों को भींचे।
दिन की राह ताकते जन-जन,
धुआँ धुआँ थे गलियाँ कूचे।
टुकड़ा धूप लपेटें तन पर,
सबको था बस इंतज़ार।
रात बड़ी दिन छोटे होंगे।
सर्द हवा के
subah subah kaanon men aakar
kahaa kisee ne namaskaar
alasaaee aankhon se dekhaa
soory kiran kee dikhee n rekhaa
nabh par the kuhare ke baadal,
neeche bhee kuharaa hee dekhaa
jaan gaee main,
yah to badale,
mausam kaa hai chamatkaar
khag soe the aankhen meenche
wihag need choojon ko bheenche
din kee raah taakate jan-jan,
dhuaan dhuaan the galiyaan kooche
tukadaa dhoop lapeten tan par,
sabako thaa bas intazaar
raat badee din chote honge
sard hawaa ke
सुबह सुबह कानों में आकर
कहा किसी ने नमस्कार।
अलसाई आँखों से देखा।
सूर्य किरण की दिखी न रेखा।
नभ पर थे कुहरे के बादल,
नीचे भी कुहरा ही देखा।
जान गई मैं,
यह तो बदले,
मौसम का है चमत्कार।
खग सोए थे आँखें मींचे।
विहग नीड़ चूजों को भींचे।
दिन की राह ताकते जन-जन,
धुआँ धुआँ थे गलियाँ कूचे।
टुकड़ा धूप लपेटें तन पर,
सबको था बस इंतज़ार।
रात बड़ी दिन छोटे होंगे।
सर्द हवा के