आस के नवगीत गाएँ aas ke nawageet gaaen आस के नवगीत गाएँ
गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले,
फिर चलो नव आस के नवगीत गाएँ।
प्रकृति आती, नित्य
नव शृंगार कर।
रूप अनुपम, रंग
उजले गोद भर।
जो हमारे हिय छुपा है चित्रकार
भाव की ले तूलिका उसको जगाएँ।
झोलियाँ भर
ख़ुशबुएँ लाती हवा।
मखमली जाजम
बिछा जाती घटा।
ख़्वाहिशों के, बाग से चुनकर सुमन
शेष शूलों की चलो होली जलाएँ।
नित्य खबरें क्यों सुनें
खूँ से भरी।
क्यों न उनकी काट दें
उगती कड़ी।
लेखनी ले हाथ में नव क्रांति की
हर खबर को खुशनुमा मिलकर बनाएँ।
देख दुख, क्यों
हों दुखी, संसार का।
पृष्ठ क्यों ना
बंद कर दें हार का।
खोजकर राहें नवल निस्तार की
जीत की अनुपम, नई दुनिया बसाएँ।
-कल्पना रामानी
नवी मुंबई
gardishon ke bhoolakar shikawe gile,
phir chalo naw aas ke nawageet gaaen
prakriiti aatee, nity
naw shriingaar kar
roop anupam, rang
ujale god bhar
jo hamaare hiy chupaa hai chitrakaar
bhaaw kee le toolikaa usako jagaaen
jholiyaan bhar
kushabuen laatee hawaa
makhamalee jaajam
bichaa jaatee ghataa
kvaahishon ke, baag se chunakar suman
shesh shoolon kee chalo holee jalaaen
nity khabaren kyon sunen
khoon se bharee
kyon n unakee kaat den
ugatee kadee
lekhanee le haath men naw kraanti kee
har khabar ko khushanumaa milakar banaaen
dekh dukh, kyon
hon dukhee, sansaar kaa
priishth kyon naa
band kar den haar kaa
khojakar raahen nawal nistaar kee
jeet kee anupam, naee duniyaa basaaen
-kalpanaa raamaanee
nawee munbaee
गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले,
फिर चलो नव आस के नवगीत गाएँ।
प्रकृति आती, नित्य
नव शृंगार कर।
रूप अनुपम, रंग
उजले गोद भर।
जो हमारे हिय छुपा है चित्रकार
भाव की ले तूलिका उसको जगाएँ।
झोलियाँ भर
ख़ुशबुएँ लाती हवा।
मखमली जाजम
बिछा जाती घटा।
ख़्वाहिशों के, बाग से चुनकर सुमन
शेष शूलों की चलो होली जलाएँ।
नित्य खबरें क्यों सुनें
खूँ से भरी।
क्यों न उनकी काट दें
उगती कड़ी।
लेखनी ले हाथ में नव क्रांति की
हर खबर को खुशनुमा मिलकर बनाएँ।
देख दुख, क्यों
हों दुखी, संसार का।
पृष्ठ क्यों ना
बंद कर दें हार का।
खोजकर राहें नवल निस्तार की
जीत की अनुपम, नई दुनिया बसाएँ।
-कल्पना रामानी
नवी मुंबई