कागा रे! kaagaa re! कागा रे!
कागा रे! मुंडेर छोड़ दे
मत मेहमान पुकार।
चूल्हा ठंडा, लकड़ी सीली
चढ़ी न चौके दाल पनीली।
शेष नहीं मुट्ठी भर आटा
औंधे सोए तवा पतीली।
क्या खाएगा प्रियम पाहुना
कुछ कर सोच-विचार।
एक कोठरी, दस बाशिंदे
मैला बिस्तर, चिंदे चिंदे।
पलकें बंद न होतीं पल भर।
चर्म चाटते, मुए पतंगे।
मच्छर चखते रक्त, रेंगते
खटमल बना कतार।
काँव काँव की टेर छोड़ दे।
इस घर से यह चोंच मोड़ दे।
नहीं चाहती अपमानित हो
आगत घर का द्वार छोड़ दे।
काग सयाने तू क्या जाने
दीनों के संस्कार।
kaagaa re! munder chod de
mat mehamaan pukaar
choolhaa thandaa, lakadee seelee
chढ़ee n chauke daal paneelee
shesh naheen mutthee bhar aataa
aundhe soe tawaa pateelee
kyaa khaaegaa priyam paahunaa
kuch kar soch-wichaar
ek kotharee, das baashinde
mailaa bistar, chinde chinde
palaken band n hoteen pal bhar
charm chaatate, mue patange
machchar chakhate rakt, rengate
khatamal banaa kataar
kaanv kaanv kee ter chod de
is ghar se yah chonch mod de
naheen chaahatee apamaanit ho
aagat ghar kaa dvaar chod de
kaag sayaane too kyaa jaane
deenon ke sanskaar
कागा रे! मुंडेर छोड़ दे
मत मेहमान पुकार।
चूल्हा ठंडा, लकड़ी सीली
चढ़ी न चौके दाल पनीली।
शेष नहीं मुट्ठी भर आटा
औंधे सोए तवा पतीली।
क्या खाएगा प्रियम पाहुना
कुछ कर सोच-विचार।
एक कोठरी, दस बाशिंदे
मैला बिस्तर, चिंदे चिंदे।
पलकें बंद न होतीं पल भर।
चर्म चाटते, मुए पतंगे।
मच्छर चखते रक्त, रेंगते
खटमल बना कतार।
काँव काँव की टेर छोड़ दे।
इस घर से यह चोंच मोड़ दे।
नहीं चाहती अपमानित हो
आगत घर का द्वार छोड़ दे।
काग सयाने तू क्या जाने
दीनों के संस्कार।