कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५१ / १६४ № 151 of 164 रचना १५१ / १६४
१० दिसम्बर २०१९ 10 December 2019 १० दिसम्बर २०१९

भ्रमण-पथ bhraman-path भ्रमण-पथ

खुलीं पलकें भोर की  पग

बढ़ चले  लय में हमारे।

हरित कुसुमित क्यारियाँ हैं

इस किनारे-उस किनारे।

॥

अरुणिमा प्राची में छाई

धूप शबनम से नहाई।

चाँद तारे कह गए हम

जा रहे हैं  दो विदाई।

॥

कान में कहती हवाएँ

नज़र कर लो सब नज़ारे।

॥

खिलीं कलियाँ हुई आहट

तितलियों की सुगबुगाहट।

पुष्प पल्लव औ लताओं

के लबों पर मुस्कुराहट।

॥

सृष्टि के साथी सभी हैं

सजग स्वागत में हमारे।

॥

बाग में बच्चों की तानें

विहग वृंदों की उड़ानें।

वृद्ध भी हर्षित हृदय हैं

साथ सब जाने अजाने।

॥

मधुर बेला यह सुबह की

प्यार से सबको निहारे।

॥

भ्रमण-पथ लंबा अकेला

लिपटकर कदमों से खेला।

कह रहा है गति बढ़ा लो

प्राणवायू का है रेला।

॥

हर दिशा संगीतमय है

मुग्ध मौसम के इशारे।

khuleen palaken bhor kee pag

bढ़ chale lay men hamaare

harit kusumit kyaariyaan hain

is kinaare-us kinaare

·

arunimaa praachee men chaaee

dhoop shabanam se nahaaee

chaand taare kah gae ham

jaa rahe hain do widaaee

·

kaan men kahatee hawaaen

nazar kar lo sab nazaare

·

khileen kaliyaan huee aahat

titaliyon kee sugabugaahat

pushp pallaw au lataaon

ke labon par muskuraahat

·

sriishti ke saathee sabhee hain

sajag svaagat men hamaare

·

baag men bachchon kee taanen

wihag wriindon kee udaanen

wriiddh bhee harshit hriiday hain

saath sab jaane ajaane

·

madhur belaa yah subah kee

pyaar se sabako nihaare

·

bhraman-path lanbaa akelaa

lipatakar kadamon se khelaa

kah rahaa hai gati bढ़aa lo

praanawaayoo kaa hai relaa

·

har dishaa sangeetamay hai

mugdh mausam ke ishaare

खुलीं पलकें भोर की  पग

बढ़ चले  लय में हमारे।

हरित कुसुमित क्यारियाँ हैं

इस किनारे-उस किनारे।

॥

अरुणिमा प्राची में छाई

धूप शबनम से नहाई।

चाँद तारे कह गए हम

जा रहे हैं  दो विदाई।

॥

कान में कहती हवाएँ

नज़र कर लो सब नज़ारे।

॥

खिलीं कलियाँ हुई आहट

तितलियों की सुगबुगाहट।

पुष्प पल्लव औ लताओं

के लबों पर मुस्कुराहट।

॥

सृष्टि के साथी सभी हैं

सजग स्वागत में हमारे।

॥

बाग में बच्चों की तानें

विहग वृंदों की उड़ानें।

वृद्ध भी हर्षित हृदय हैं

साथ सब जाने अजाने।

॥

मधुर बेला यह सुबह की

प्यार से सबको निहारे।

॥

भ्रमण-पथ लंबा अकेला

लिपटकर कदमों से खेला।

कह रहा है गति बढ़ा लो

प्राणवायू का है रेला।

॥

हर दिशा संगीतमय है

मुग्ध मौसम के इशारे।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗