भ्रमण-पथ bhraman-path भ्रमण-पथ
खुलीं पलकें भोर की पग
बढ़ चले लय में हमारे।
हरित कुसुमित क्यारियाँ हैं
इस किनारे-उस किनारे।
अरुणिमा प्राची में छाई
धूप शबनम से नहाई।
चाँद तारे कह गए हम
जा रहे हैं दो विदाई।
कान में कहती हवाएँ
नज़र कर लो सब नज़ारे।
खिलीं कलियाँ हुई आहट
तितलियों की सुगबुगाहट।
पुष्प पल्लव औ लताओं
के लबों पर मुस्कुराहट।
सृष्टि के साथी सभी हैं
सजग स्वागत में हमारे।
बाग में बच्चों की तानें
विहग वृंदों की उड़ानें।
वृद्ध भी हर्षित हृदय हैं
साथ सब जाने अजाने।
मधुर बेला यह सुबह की
प्यार से सबको निहारे।
भ्रमण-पथ लंबा अकेला
लिपटकर कदमों से खेला।
कह रहा है गति बढ़ा लो
प्राणवायू का है रेला।
हर दिशा संगीतमय है
मुग्ध मौसम के इशारे।
khuleen palaken bhor kee pag
bढ़ chale lay men hamaare
harit kusumit kyaariyaan hain
is kinaare-us kinaare
arunimaa praachee men chaaee
dhoop shabanam se nahaaee
chaand taare kah gae ham
jaa rahe hain do widaaee
kaan men kahatee hawaaen
nazar kar lo sab nazaare
khileen kaliyaan huee aahat
titaliyon kee sugabugaahat
pushp pallaw au lataaon
ke labon par muskuraahat
sriishti ke saathee sabhee hain
sajag svaagat men hamaare
baag men bachchon kee taanen
wihag wriindon kee udaanen
wriiddh bhee harshit hriiday hain
saath sab jaane ajaane
madhur belaa yah subah kee
pyaar se sabako nihaare
bhraman-path lanbaa akelaa
lipatakar kadamon se khelaa
kah rahaa hai gati bढ़aa lo
praanawaayoo kaa hai relaa
har dishaa sangeetamay hai
mugdh mausam ke ishaare
खुलीं पलकें भोर की पग
बढ़ चले लय में हमारे।
हरित कुसुमित क्यारियाँ हैं
इस किनारे-उस किनारे।
अरुणिमा प्राची में छाई
धूप शबनम से नहाई।
चाँद तारे कह गए हम
जा रहे हैं दो विदाई।
कान में कहती हवाएँ
नज़र कर लो सब नज़ारे।
खिलीं कलियाँ हुई आहट
तितलियों की सुगबुगाहट।
पुष्प पल्लव औ लताओं
के लबों पर मुस्कुराहट।
सृष्टि के साथी सभी हैं
सजग स्वागत में हमारे।
बाग में बच्चों की तानें
विहग वृंदों की उड़ानें।
वृद्ध भी हर्षित हृदय हैं
साथ सब जाने अजाने।
मधुर बेला यह सुबह की
प्यार से सबको निहारे।
भ्रमण-पथ लंबा अकेला
लिपटकर कदमों से खेला।
कह रहा है गति बढ़ा लो
प्राणवायू का है रेला।
हर दिशा संगीतमय है
मुग्ध मौसम के इशारे।